‘आदित्य ठाकरे, हाजिर हो!’: ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे में ठाणे कोर्ट ने जारी किए समन; ‘मातोश्री’ पहुंचेगा कोर्ट का बेलिफ!

‘मेरा इस मामले से कोई संबंध नहीं, याचिका राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है, पुलिस पहले ही जांच कर चुकी है और CBI ने भी क्लीन चिट दे दी है’ — आदित्य ठाकरे की आपत्तियां हाईकोर्ट ने कीं खारिज!

CBI के न्यायालय में दिए गए बयान से खुलासा—CBI ने इस मामले की कभी जांच ही नहीं की थी; आखिरकार आदित्य ठाकरे के वकीलों को हाईकोर्ट में मांगनी पड़ी बिना शर्त माफी!

हाईकोर्ट के आदेश के बाद आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, परमबीर सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार, हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और सबूत नष्ट करने के आरोपों में CBI ने दर्ज की FIR!

हाईकोर्ट द्वारा आपत्तियां खारिज करने और CBI जांच के आदेश के बावजूद ‘राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित याचिका’ बताकर बदनामी जारी रखने का आरोप; ₹500-₹500 करोड़ के दो नोटिस के बाद भी नहीं हटाई गईं पोस्ट!

आज की सुनवाई में आदित्य ठाकरे की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं; समन मिलने के बाद भी गैरहाजिर रहने पर एकतरफा कार्यवाही की संभावना!

₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी, संपत्ति और बैंक खातों की कुर्की तथा सिविल जेल भेजने की मांग पर 4 नवंबर को सुनवाई!

मुंबई/ठाणे, 21 अक्टूबर 2026: दिशा सालियान की मौत के मामले में न्याय प्राप्त करने के लिए जारी कानूनी लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। ठाणे की सिविल अदालत ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद संजय राउत सहित नौ प्रतिवादियों के खिलाफ ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे में समन जारी करने का आदेश दिया है।

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दाखिल विशेष सिविल मुकदमा क्रमांक 469/2026 में अदालत ने मुख्य मुकदमे में समन तथा अंतरिम राहत के आवेदन पर नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया।

आज की सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से कोई भी वकील अदालत में उपस्थित नहीं था।

अब अदालत का अधिकृत अधिकारी, अर्थात कोर्ट बेलिफ, आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे के निवास स्थान ‘मातोश्री’ पर जाकर समन की तामील करेगा। अन्य प्रतिवादियों को भी उनके संबंधित आवासीय पतों पर समन और नोटिस की तामील की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

‘मेरा कोई संबंध नहीं, सबूत नहीं हैं, याचिका राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और CBI क्लीन चिट दे चुकी है!’ — आदित्य ठाकरे की आपत्तियां हाईकोर्ट ने कीं खारिज; वकीलों को मांगनी पड़ी माफी!

दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज कर CBI से जांच कराने की मांग को लेकर सतीश सालियान ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

इस याचिका का विरोध करते हुए आदित्य ठाकरे ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। उनके वकीलों ने भी सुनवाई के दौरान कई आपत्तियां उठाई थीं।

आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया था कि दिशा सालियान की मौत से उनका कोई संबंध नहीं है, सतीश सालियान के पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है, मौत में किसी प्रकार का आपराधिक कृत्य या फाउल प्ले नहीं हुआ है और पूरी याचिका केवल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है।

इसके अतिरिक्त यह भी दावा किया गया था कि मुंबई पुलिस पहले ही मामले की जांच कर चुकी है और CBI ने भी जांच करके आदित्य ठाकरे को क्लीन चिट दे दी है।

इन्हीं आधारों पर आदित्य ठाकरे ने मांग की थी कि इस मामले में FIR दर्ज करने या CBI जांच का आदेश देने की कोई आवश्यकता नहीं है और सतीश सालियान की याचिका खारिज कर दी जाए।

लेकिन हाईकोर्ट में कार्यवाही के दौरान CBI द्वारा प्रस्तुत किए गए बयान से यह सामने आया कि CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में इससे पहले कभी कोई जांच ही नहीं की थी। इस प्रकार CBI द्वारा पहले ही क्लीन चिट दिए जाने का दावा गलत निकला।

इसके बाद 28 अगस्त 2026 को आदित्य ठाकरे के वकीलों को हाईकोर्ट में इस गलत दावे के लिए बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदित्य ठाकरे की ओर से उठाई गई आपत्तियां स्वीकार नहीं कीं। याचिका राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित होने, उसमें कोई तथ्य नहीं होने तथा FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होने की दलीलों को खारिज कर दिया गया।

दिशा सालियान की मौत की पूर्व जांच में सामने आई गंभीर विसंगतियों, संदिग्ध परिस्थितियों और फॉरेंसिक साक्ष्यों से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र आपराधिक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया।

आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे और परमबीर सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ CBI में गंभीर धाराओं में FIR

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने RC.6(S)/2026/CBI/SC-II/New Delhi क्रमांक से FIR दर्ज की।

इस मामले में आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, सचिन वाझे और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप शामिल किए गए।

FIR में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-B, 376-D, 302, 201, 217 और 218 के अंतर्गत सामूहिक बलात्कार, हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, सबूत नष्ट करने, आरोपियों को बचाने के लिए गलत या झूठे सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने तथा जांच में जानबूझकर अनियमितताएं करने से संबंधित अपराध शामिल हैं।

इन गंभीर आरोपों की जांच CBI के अधीन है। FIR दर्ज होने से आरोपियों का अपराध सिद्ध नहीं होता; इसका निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

हाईकोर्ट ने आपत्तियां खारिज कीं, CBI ने FIR दर्ज की; फिर भी ‘राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित याचिका’ बताने का सिलसिला जारी!

हाईकोर्ट में आदित्य ठाकरे की आपत्तियां खारिज हुईं। CBI ने स्पष्ट किया कि उसने पहले कभी इस मामले की जांच नहीं की थी। क्लीन चिट का दावा गलत निकलने पर आदित्य ठाकरे के वकीलों को माफी मांगनी पड़ी। इसके बाद हाईकोर्ट ने FIR और CBI जांच का आदेश दिया तथा CBI ने गंभीर धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज किया।

इन सभी घटनाक्रमों के बावजूद सतीश सालियान की न्यायिक लड़ाई को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताने का सिलसिला जारी रहा।

आदित्य ठाकरे, उनके प्रवक्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा सोशल मीडिया, सार्वजनिक मंचों तथा विभिन्न माध्यमों से यह आरोप बार-बार दोहराए जाने का मुद्दा मानहानि मुकदमे में उठाया गया है।

हाईकोर्ट द्वारा आपत्तियां खारिज किए जाने और CBI द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बावजूद सतीश सालियान की न्यायिक लड़ाई को राजनीतिक षड्यंत्र बताकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले बयान जारी रखे गए।

अपनी बेटी की मौत का सच सामने लाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना एक पिता का कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। इसी न्यायिक संघर्ष को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताकर बदनाम करने के खिलाफ अब ₹2,000 करोड़ का सिविल मुकदमा दाखिल किया गया है।

पहले ₹500-₹500 करोड़ के दो कानूनी नोटिस; फिर भी नहीं हटाईं बदनामीकारक पोस्ट!

सतीश सालियान की ओर से संबंधित पक्षों को पहले ₹500-₹500 करोड़ के दो कानूनी नोटिस भेजे गए थे।

इन नोटिसों के माध्यम से बदनामीकारक बयान वापस लेने, सोशल मीडिया पर प्रकाशित विवादित पोस्ट और वीडियो हटाने तथा प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के लिए जवाबदेही स्वीकार करने की मांग की गई थी।

लेकिन नोटिस भेजे जाने के बाद भी संबंधित पोस्ट नहीं हटाई गईं और विवादित बयानों का सिलसिला बंद नहीं हुआ।

इसके बाद सतीश सालियान ने ठाणे की सिविल अदालत में ₹2,000 करोड़ की मानहानि क्षतिपूर्ति का मुकदमा दाखिल किया।

‘मातोश्री’ पर पहुंचेगा अदालत का बेलिफ; सभी नौ प्रतिवादियों को समन!

इस मुकदमे में आदित्य ठाकरे के अतिरिक्त पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, सांसद संजय राउत, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, सुषमा अंधारे, पत्रकार निखिल वागले, वरुण सरदेसाई, अखिल चितरे और अधिवक्ता असीम सरोदे को प्रतिवादी बनाया गया है।

अदालत द्वारा समन जारी करने का आदेश दिए जाने के बाद अब उनकी औपचारिक तामील की प्रक्रिया शुरू होगी।

आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे को उनके निवास स्थान ‘मातोश्री’ पर न्यायालय के अधिकृत बेलिफ के माध्यम से समन की तामील की जाएगी।

इसी प्रकार अन्य सभी प्रतिवादियों को उनके संबंधित आवासीय पतों पर समन और नोटिस की तामील की जाएगी।

आज आदित्य ठाकरे का कोई वकील उपस्थित नहीं; समन के बाद भी गैरहाजिर रहने पर एकतरफा कार्यवाही संभव!

आज की सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से कोई भी वकील अदालत में उपस्थित नहीं था।

अब समन की विधिवत तामील होने के बाद प्रतिवादियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 6 के अनुसार, यदि किसी प्रतिवादी को विधिवत समन प्राप्त हो चुका है और इसके बावजूद वह या उसका वकील अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो न्यायालय एकतरफा (Ex Parte) कार्यवाही आगे बढ़ा सकता है।

ऐसी स्थिति में वादी के साक्ष्यों और दावे का कानूनी परीक्षण करने के बाद अदालत एकतरफा निर्णय तथा डिक्री पारित कर सकती है।

₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी, संपत्ति और बैंक खातों की कुर्की तथा सिविल जेल की मांग!

सतीश सालियान ने मुख्य मानहानि मुकदमे के साथ कठोर अंतरिम राहतों के लिए एक अलग आवेदन भी दाखिल किया है।

इस आवेदन में अदालत से मांग की गई है कि प्रतिवादियों को ₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का आदेश दिया जाए।

इसके अतिरिक्त उनकी चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की कुर्की का आदेश देने तथा आवश्यक सुरक्षा राशि प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में कानून के अनुसार सिविल जेल में निरुद्ध करने की कार्यवाही करने की मांग की गई है।

साथ ही सोशल मीडिया पर प्रकाशित सभी विवादित और बदनामीकारक पोस्ट, वीडियो, सार्वजनिक बयान तथा अन्य डिजिटल सामग्री हटाने और संबंधित प्रतिवादियों को सार्वजनिक माफी मांगने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

इस अंतरिम आवेदन पर अदालत ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया है और अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

अंतरिम आवेदन पर प्रतिवादियों का जवाब अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करने की मांग है।

फिलहाल अदालत ने बैंक गारंटी जमा कराने, संपत्ति कुर्क करने या किसी को सिविल जेल भेजने का आदेश नहीं दिया है। इन मांगों पर सुनवाई होना बाकी है।

मुख्य ₹2,000 करोड़ के मुकदमे में जवाब के लिए सामान्यतः 30 दिन

₹2,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति का मुख्य सिविल मुकदमा और अंतरिम राहतों का आवेदन दो अलग न्यायिक प्रक्रियाएं हैं।

सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के अनुसार, प्रतिवादियों को समन की तामील की तारीख से सामान्यतः 30 दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब (Written Statement) दाखिल करना होता है। लागू कानूनी प्रावधानों और न्यायालय के आदेश के अनुसार अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।

मुख्य मुकदमे में ₹2,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति संबंधी दावे पर जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया अलग से चलेगी।

जबकि ₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी, संपत्ति कुर्की, सिविल जेल और विवादित पोस्ट हटाने की अंतरिम मांगों पर 4 नवंबर को सुनवाई होगी।

अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल, अनुष्का सोनावणे, तनवीर निजाम और अभिषेक मिश्रा ने रखीं दलीलें

बुधवार को ठाणे की अदालत में सतीश सालियान की ओर से अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल, अधिवक्ता अनुष्का सोनावणे, अधिवक्ता तनवीर निजाम और अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट की पूर्व कार्यवाही, CBI क्लीन चिट के दावे, उसके बाद मांगी गई माफी, FIR और CBI जांच के आदेश तथा आपराधिक मामला दर्ज होने के बावजूद जारी कथित बदनामीकारक बयानों का मुद्दा अदालत के समक्ष रखा।

उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित पक्षों को पहले कानूनी नोटिस देकर विवादित सामग्री हटाने और मानहानि बंद करने का अवसर दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया।

एक पिता द्वारा अपनी बेटी की मौत के मामले में न्याय पाने के लिए किए जा रहे कानूनी संघर्ष और उसकी प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए प्रभावी न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक होने की दलीलें प्रस्तुत की गईं।

इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मुख्य मुकदमे में समन और अंतरिम आवेदन पर नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया।

अब 4 नवंबर की सुनवाई पर नजर; आदित्य ठाकरे और अन्य प्रतिवादी क्या जवाब देंगे?

ठाणे अदालत के आदेश के बाद सतीश सालियान के ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे में अगली न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी।

एक ओर मुख्य मुकदमे में ₹2,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति मांगी गई है, तो दूसरी ओर अंतरिम आवेदन में तत्काल बैंक गारंटी, संपत्तियों की कुर्की, सिविल जेल संबंधी कार्रवाई और बदनामीकारक सामग्री हटाने जैसे आदेश मांगे गए हैं।

4 नवंबर को अंतरिम आवेदन पर सुनवाई होगी। इस दौरान आदित्य ठाकरे और अन्य प्रतिवादियों की ओर से प्रस्तुत जवाब तथा अदालत की अगली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

‘आदित्य ठाकरे, हाजिर हो!’ — ठाणे अदालत के समन जारी करने के आदेश के बाद अब ‘मातोश्री’ पर समन की तामील और 4 नवंबर की सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

अगली सुनवाई: 4 नवंबर 2026 — ठाणे सिविल कोर्ट।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *