रशीद खान पठान की याचिका पर सुनवाई।
Enforcement Directorate v. Padmanabhan Kishore, (2022) 19 SCC 612 के आधारपर शाहरुख़ खान, आर्यन खान, पूजा दादलानी के खिलाफ रिश्वत देने के आरोपों में भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कानून और ED के PMLA कानून के तहत FIR करने की मांग।
मुंबई: समीर वानखेड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा CBI को और समय देने से इनकार किए जाने के बाद एजेंसी गंभीर संकट में घिरती दिखाई दे रही है। अंतिम सुनवाई के चरण में अदालत के सख्त रुख ने मामले को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। [Rashid Khan Pathan vs. Shahrukh Khan PIL (St.) No. 10580 of 2023]।
पिछले तीन वर्षों से CBI इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने में देरी कर रही है, क्योंकि उसके सामने अब केवल दो स्पष्ट विकल्प बचे दिखाई देते हैं। पहला, पूर्व NCB अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ मामला बंद कर दिया जाए। दूसरा, अपने ही आरोपों के अनुरूप आगे बढ़ते हुए शाहरुख खान, आर्यन खान और पूजा ददलानी के खिलाफ कथित रिश्वत देने के आरोप में कार्रवाई की जाए, क्योंकि रिश्वत देना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8-A के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
उल्लेखनीय है कि 8 जुलाई 2025 के आदेश में हाईकोर्ट ने CBI को मामले की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने का अंतिम अवसर दिया था। इसके बावजूद एजेंसी निर्धारित समयसीमा के भीतर मामले को समाप्त नहीं कर सकी।
विवाद की शुरुआत 11 मई 2023 को दर्ज FIR से हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि समीर वानखेड़े ने कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में आर्यन खान को राहत दिलाने के लिए शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी और शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी के माध्यम से एक कथित बिचौलिए से 50 लाख रुपये अग्रिम के रूप में स्वीकार किए थे।
हालांकि, इस मामले में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया, जब शाहरुख खान ने कथित तौर पर ऐसी किसी भी रिश्वत देने की घटना से इनकार कर दिया। इस इनकार ने सीबीआई की पूरी कहानी की बुनियाद ही ख़तम कर दी।
समीर वानखेड़े को 19 मई 2023 को बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ से अंतरिम राहत प्राप्त हुई थी। इसके बाद राशिद खान पठान और अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट में क्रिमिनल PIL (L) नंबर 10580 of 2023 दायर की। इस जनहित याचिका में वैकल्पिक प्रार्थना की गई कि यदि CBI का आरोप सही है, तो रिश्वत देने के आरोप में शाहरुख खान एवं अन्य को आरोपी बनाया जाए, और यदि ऐसा नहीं है, तो समीर वानखेड़े को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए झूठी FIR दर्ज कर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के आरोप में NCB और CBI के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मामले की गंभीरता के बावजूद, CBI पर आरोप है कि उसने लगभग तीन वर्षों तक अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से परहेज किया। एजेंसी ने 8 जुलाई 2025 को अदालत के समक्ष आश्वासन दिया था कि अक्टूबर 2025 तक मामले की जाच पूरी करके अंतीम हल निकाल लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
8 जुलाई 2025 के आदेश में अदालत ने स्पष्ट रूप से CBI को तीन महीने का अंतिम अवसर दिया था। फिर भी वह समयसीमा भी बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई।
इसके बाद लगभग पांच महीने और बीत जाने पर राशिद खान पठान ने अपनी रिट याचिका को आगे बढ़ाया, जो 23 मार्च 2026 को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष समीर वानखेड़े की याचिका के साथ सूचीबद्ध हुई। राशिद खान पठान की ओर से उपस्थित अधिवक्ता निलेश ओझा ने CBI की कथित अवैधता की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।
इसके बावजूद CBI ने एक बार फिर अपने वकीलों की अनुपलब्धता का हवाला देकर और समय मांगने का प्रयास किया। लेकिन इस बार मुख्य न्यायाधीश ने मामले को और लंबा खिंचने देने के पक्ष में रुख नहीं दिखाया और सुनवाई आगे बढ़ाई।
इसके बाद जब मामला पुनः लिया गया, तब समीर वानखेड़े की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आबाद पोंडा ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ आदेशो को रिकॉर्ड पर लाने के लिए अल्प समय की मांग की। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।
यह छोटा सा स्थगन अब CBI को अत्यंत नाजुक स्थिति में ले आया है। आने वाले दो सप्ताह में एजेंसी को यह तय करना पड़ सकता है कि वह अंततः समीर वानखेड़े के खिलाफ का मामला बंद करेगी, अंतिम रिपोर्ट दाखिल करेगी, या फिर अपने ही आरोपों को तार्किक कानूनी परिणति तक पहुंचाते हुए शाहरुख खान, आर्यन खान और पूजा ददलानी को आरोपी बनाएगी।
सुप्रीम कोर्टने ने Enforcement Directorate v. Padmanabhan Kishore, (2022) 19 SCC 612 स्पष्ट किया है की रिश्वत देने वाले के खिलाफ भ्रष्टाचार प्रतिशोध कानून और इ.डी के प्रेवेन्शन ऑफ मनी लॉंडरिंग ऍक्ट, 2002 के सेकशन – 3 और 4 के तहत कारवाही जरूरी है।
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