दिशा सालियान के कथित गैंगरेप और हत्या से संबंधित चल रही न्यायिक कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदेश पाटिल ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है।
यह मामला वर्तमान में अत्यंत निर्णायक चरण में पहुँच चुका है, जहाँ आदित्य ठाकरे और अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध गैंगरेप और हत्या के अपराधों के संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए जाने की मांग की जा रही है। याचिकाकर्ता इस प्रकरण में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप तथा आपराधिक कार्यवाही प्रारंभ करने की लगातार मांग कर रहे हैं।
माननीय उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार, इस रिट याचिका को 20.01.2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना था। किंतु उक्त तिथि पर मामला सूचीबद्ध नहीं किया गया। इसके परिणामस्वरूप, दिशा सालियान के पिता श्री सतीश सालियान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय कुर्ले ने मामले की त्वरित सुनवाई हेतु इसे जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की खंडपीठ के समक्ष मेंशन किया।
इसी दौरान जस्टिस संदेश पाटिल ने अधिवक्ताओं को सूचित किया कि वे पूर्व में इसी रिट याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से अधिवक्ता के रूप में जुड़े रहे हैं, और इसी कारण वे इस याचिका की सुनवाई नहीं कर सकते।
तदनुसार, न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया कि यह याचिका ऐसी उपयुक्त पीठ के समक्ष प्रस्तुत की जाए, जिसमें जस्टिस संदेश पाटिल सदस्य न हों।
आज पुनः श्री सतीश सालियान की ओर से कई अधिवक्ता इस मामले की शीघ्र सुनवाई हेतु न्यायालय में उपस्थित हुए। अधिवक्ताओं की टीम में अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा, अधिवक्ता शिवम गुप्ता, अधिवक्ता अनुष्का सोनावणे सहित अन्य सहायक अधिवक्ता शामिल थे। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए, त्वरित सूचीबद्धता तथा उचित निर्देश प्राप्त करने के उद्देश्य से इस प्रकरण का उल्लेख किया गया।
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