CBI को सौंपे जाएंगे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों का विवरण; सतीश सालियन ने आरोपियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की
दिशा सालियन के कथित सामूहिक बलात्कार, हत्या तथा उसके बाद कथित रूप से किए गए सुनियोजित कवर-अप की जारी जांच के सिलसिले में दिल्ली से CBI के एक अधिकारी मुंबई स्थित CBI कार्यालय पहुंच चुके हैं।
कल दोपहर 2:00 बजे, श्री सतीश सालियन अपने अधिवक्ताओं के साथ उक्त CBI अधिकारी को औपचारिक रूप से एक पेन ड्राइव तथा अन्य महत्वपूर्ण सामग्री सौंपेंगे।
पेन ड्राइव में उपलब्ध सामग्री में एक व्यक्ति की वीडियो-रिकॉर्डेड प्रत्यक्षदर्शी गवाही भी शामिल है। उक्त व्यक्ति का दावा है कि वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी है और उसने घटनास्थल पर आदित्य ठाकरे तथा अन्य व्यक्तियों को कथित जघन्य अपराध और हत्या में संलिप्त होते हुए स्वयं देखा था। इस प्रकार यह केवल सुनी-सुनाई जानकारी का दावा नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति द्वारा स्वयं को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए दिया गया गंभीर बयान है।
इस वीडियो-रिकॉर्डेड बयान के अतिरिक्त श्री सतीश सालियन CBI को अन्य प्रत्यक्षदर्शियों, महत्वपूर्ण व्यक्तियों तथा मामले की परिस्थितियों की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले लोगों का विवरण और उनसे संबंधित अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराएंगे, ताकि CBI इन व्यक्तियों के बयान दर्ज कर सके और उपलब्ध डिजिटल एवं अन्य साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से जांच तथा सत्यापन कर सके।
आरोपियों एवं कथित कवर-अप में शामिल अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग
श्री सतीश सालियन ने मांग की है कि जिन व्यक्तियों के विरुद्ध पहले से उपलब्ध सामग्री और अब CBI को सौंपी जा रही अतिरिक्त सामग्री से संज्ञेय एवं गंभीर अपराधों में उनकी कथित भूमिका की जांच आवश्यक होती है, उनके विरुद्ध बिना अनावश्यक विलंब के कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए।
इस मांग में परम बीर सिंह, आदित्य ठाकरे एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ उन पुलिस अधिकारियों तथा अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच और, पर्याप्त कानूनी आधार पाए जाने पर, उनकी गिरफ्तारी भी शामिल है जिन पर कथित रूप से साक्ष्यों को दबाने, नष्ट करने, गलत रिकॉर्ड तैयार करने, जांच को भटकाने अथवा आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।
श्री सतीश सालियन का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय के दिनांक 02.09.2026 के आदेश के पैरा 37 एवं 38 में दर्ज तथ्यों और परिस्थितियों को भी CBI जांच में गंभीरता से लिया जाना चाहिए तथा जिन पुलिस अधिकारियों, गवाहों अथवा अन्य व्यक्तियों की भूमिका उन परिस्थितियों के कारण जांच के दायरे में आती है, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
श्री सतीश सालियन ने यह भी मांग की है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर IPC की धारा 409 सहित अन्य लागू दंडात्मक प्रावधानों की प्रयोज्यता की जांच की जाए। विशेष रूप से यह जांच की जाए कि क्या किसी लोक सेवक द्वारा अपने पद एवं आधिकारिक नियंत्रण में प्राप्त रिकॉर्ड अथवा संपत्ति के संबंध में आपराधिक न्यासभंग हुआ तथा क्या सरकारी रिकॉर्ड/साक्ष्यों के कथित विनाश, छेड़छाड़ या दमन और आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस मशीनरी के कथित दुरुपयोग के संबंध में अन्य उपयुक्त दंडात्मक धाराएं भी लागू होती हैं।
BPR&D की SOP में संदिग्ध की शीघ्र गिरफ्तारी पर जोर
महिलाओं के विरुद्ध बलात्कार के मामलों की जांच एवं अभियोजन के संबंध में Bureau of Police Research & Development (BPR&D) द्वारा जारी SOP — “Investigation and Prosecution of Rape against Women” — भी संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाई जा रही है।
उक्त SOP के बिंदु क्रमांक 18, “Arrest of the Suspect”, में संदिग्ध की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए सभी प्रयास किए जाने की बात कही गई है। यदि कोई संदिग्ध छिपता है, फरार होता है अथवा गिरफ्तारी से बचता है, तो जांच अधिकारी द्वारा न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त करने तथा आवश्यक परिस्थितियों में Cr.P.C. की धारा 82 एवं 83 के अंतर्गत आगे की प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान बताया गया है।
श्री सतीश सालियन का कहना है कि गंभीर प्रकृति के आरोपों और CBI को उपलब्ध कराई जा रही सामग्री को देखते हुए जांच तेजी से, निष्पक्ष रूप से और बिना किसी व्यक्ति के पद, प्रभाव अथवा राजनीतिक हैसियत से प्रभावित हुए आगे बढ़नी चाहिए।
परम बीर सिंह के सार्वजनिक बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने एक सार्वजनिक इंटरव्यू में कथित तौर पर इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण बयान दिए हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच की मांग भी की जा रही है।
परम बीर सिंह ने कथित रूप से कहा कि उनके पास विभिन्न वीडियो एवं अन्य सामग्री मौजूद है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर वह संबंधित प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से नार्को-एनालिसिस टेस्ट के लिए तैयार होने की बात भी कही।
उक्त इंटरव्यू में उन्होंने विभिन्न गंभीर अपराधों एवं उनके कथित कवर-अप के संबंध में भी आरोप लगाए, जिनमें “मातोश्री” से जुड़े व्यक्तियों के संदर्भ में किए गए दावे भी शामिल बताए गए हैं।
ऐसी स्थिति में उनके पास वीडियो एवं अन्य सामग्री होने के दावे को केवल एक मीडिया बयान मानकर छोड़ने के बजाय, श्री सतीश सालियन की मांग है कि CBI परम बीर सिंह से विस्तृत पूछताछ करे, उनके द्वारा बताए गए वीडियो एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक/दस्तावेजी साक्ष्य तत्काल प्राप्त एवं सुरक्षित करे, उनके स्रोत और प्रामाणिकता की फॉरेंसिक जांच कराए तथा उनके सार्वजनिक बयानों में लगाए गए प्रत्येक महत्वपूर्ण आरोप का स्वतंत्र सत्यापन करे।
यदि कोई व्यक्ति स्वयं सार्वजनिक रूप से यह कह रहा है कि उसके पास मामले से संबंधित महत्वपूर्ण वीडियो अथवा अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, तो ऐसी सामग्री का शीघ्र संरक्षण और विधिसम्मत परीक्षण जांच की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री सतीश सालियन की मांग है कि अब CBI के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे प्रत्यक्षदर्शी के वीडियो बयान, अन्य गवाहों की जानकारी, डिजिटल साक्ष्यों तथा पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड को समग्र रूप से जांचा जाए और जहां कानूनन पर्याप्त आधार उपलब्ध हो, वहां संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल और प्रभावी वैधानिक कार्रवाई की जाए।