दिशा सालियन केस में बड़ा खुलासा: अर्जुन रजाने ने जिस CCTV हार्ड डिस्क को बताया था ‘गुम’, वह मिली; फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई. आदित्य ठाकरे की मुश्किलें बढ़ी I

SIT के पूर्व सदस्य शैलेंद्र नगरकर ने की पुष्टि; हार्ड डिस्क को लेकर अर्जुन रजाने के पुराने बयान झूठे, CBI को पहले ही दी गई थी IPC 409 के तहत कार्रवाई की अर्जीl

मुंबई | 28 सितंबर 2026

दिशा सालियन प्रकरण में CCTV की उस महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसे जांच के दौरान कथित रूप से ‘गुम’ बताया गया था। SIT के सदस्य रहे शैलेंद्र नगरकर ने आज हुई बातचीत में पुष्टि की कि संबंधित हार्ड डिस्क मिल चुकी है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

नगरकर आज बॉम्बे हाईकोर्ट में एक सुनवाई के सिलसिले में आए थे। इसी दौरान उनकी एडवोकेट नीलेश ओझा से मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान नगरकर ने बताया कि CCTV की संबंधित हार्ड डिस्क अब मिल गई है और फॉरेंसिक विभाग को भेजी जा चुकी है।

अर्जुन रजाने ने SIT के सामने अपने बयान में कहा था हार्ड डिस्क गुम हो गई है।

यह घटनाक्रम इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि तत्कालीन जांच अधिकारी अर्जुन रजाने ने अपने बयान में कथित तौर पर कहा था कि CCTV की संबंधित हार्ड डिस्क गुम हो गई है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रजाने ने इसकी जिम्मेदारी अपने से पहले मामले को देख रहे API कनवाज़े पर डालते हुए यह भी कहा था कि कनोजिया ने उन्हें वह हार्ड डिस्क दी ही नहीं थी।

लेकिन शिकायतकर्ता पक्ष ने SIT रिकॉर्ड  से ऐसे दस्तावेज और सबूत प्रस्तुत किए जिनसे API रजाने के उक्त कथन का झूठ उजागर हो गया। इसके बाद CCTV हार्ड डिस्क गायब होने के मामले में अर्जुन रजाने के विरुद्ध IPC की धारा 409 सहित अन्य लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए CBI को बाकायदा अर्जी भी दी गई है। धारा 409 के तहत दोषसिद्धि होने पर, आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

शिकायत के बाद अब हार्ड डिस्क मिलने की जानकारी

अब नया घटनाक्रम यह है कि जिस हार्ड डिस्क को पहले गुम बताया गया था, उसके मिल जाने की जानकारी सामने आई है। शैलेंद्र नगरकर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हार्ड डिस्क फॉरेंसिक जांच के लिए भी भेजी जा चुकी है।

इस घटनाक्रम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है अगर हार्ड डिस्क वास्तव में गुम हो गई थी, जैसा कि अर्जुन रजाने के कथित बयान में कहा गया था, तो आखिर वह अब कहां से और कैसे मिली? वह इतने समय तक किसके पास थी? उसकी chain of custody क्या थी? और यदि वह उपलब्ध थी, तो पहले उसे गुम क्यों बताया गया?

 

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि रजाने के विरुद्ध कार्रवाई की मांग और उनके पुराने कथन को गलत साबित करने वाले दस्तावेज CBI के सामने रखे जाने के बाद ही हार्ड डिस्क उपलब्ध होने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम की पूरी समयरेखा और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

शैलेंद्र नगरकर का अब मालवानी पुलिस स्टेशन से तबादला हो चुका है। इसलिए आगे इस हार्ड डिस्क, उसके फॉरेंसिक परीक्षण तथा उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच CBI द्वारा की जानी है।

‘गुम’ बताई गई हार्ड डिस्क का अचानक उपलब्ध होना अपने आप में जांच का एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अब CBI के सामने न केवल CCTV डेटा की सत्यता की जांच, बल्कि हार्ड डिस्क के कथित रूप से गायब होने से लेकर उसके दोबारा सामने आने तक की पूरी chain of custody की पड़ताल का भी सवाल है।

DVR मे छेड़छाड़ मे अर्जुन रजाने और परमबीर सिंह आरोपी

API हसन मुलाणी ने SIT के सामने अपने बयान साफ तौर से कहा था की DVR को17.06.2020 को पंचनामा करके पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था। इस जवाब ने अर्जुन रजाने तथा परमबीर के झूठ को उजागर किया जिसमे वे कह रहे है थे की17.06.2020 नही बल्कि 30.09.2020 को DVR को कब्जे में लिया था।

आदित्य ठाकरे और अन्य आरोपियो को मदत कराने के लिए DVR की फाइल डिलीट कराने के मामले में अर्जुन रजाने, परमबीर और सचिन वाज़े के खिलाफ पहले से ही CBI में सबूतों के साथ शिकायत दो जा चुकी है।

API अर्जुन रजाने ने अपनी 04.06.2021 की रिपोर्ट में खुद लिखा था की original DVR मे पासवर्ड डालकर 04.06.2020 से लेकर 09.06.2020 तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ले गई थी.

लेकिन जब फॉरेंसिक विभाग ने 4 जून से 9 जून तक की रिकॉर्डिंग गायब पाई तब वही रजाने नया बचाव तैयार कर रहे है की गलती से डिलीट हो गई. कानून की नज़र में ऐसे कोई बयान मंजूर नहीं है. Section 52 of IPC में सपस्ट कहा गया है की लापरवाही करने वाला अधिकारी सजा का हक़दार है.

Nothing can be said to be done in good faith when it is not done with due care & caution. [Noor Mohamed v. Nadirshah Ismailshah Patel, 2003 SCC OnLine Bom 1233].

 

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