दिशा सालियन के पिता का ₹2,000 करोड़ का विशेष दीवानी वाद क्रमांक 469/2026 ठाणे अदालत में दाखिल; जनभागीदारी से प्रत्येक नागरिक का सांकेतिक एक रुपया योगदान लेकर ₹3 लाख की कोर्ट फीस जमा! वसूल होने वाली क्षतिपूर्ति की 99 प्रतिशत राशि पीड़ित महिलाओं और नागरिकों में बांटी जाएगी!
‘यह लड़ाई अकेले सतीश सालियन की नहीं, बल्कि जनता की लड़ाई है!’ — एडवोकेट तनवीर निजाम; न्याय के लिए नागरिकों के योगदान से खड़ा हुआ ऐतिहासिक कानूनी संघर्ष!
21 अक्टूबर को न्यायाधीश पानसरे मैडम के समक्ष प्रारंभिक सुनवाई; उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत, अनिल देशमुख, सुषमा अंधारे, अखिल चित्रे, असीम सरोदे और निखिल वागले के खिलाफ निषेधाज्ञा, ₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी, संपत्ति कुर्की और बैंक गारंटी नहीं देने पर सिविल जेल भेजने की मांग!
हाईकोर्ट के आदेश और सबूत मौजूद होने के बावजूद झूठी खबरें, एकतरफा रिपोर्टिंग और ‘राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित’ होने का प्रचार करके बदनाम करने का गंभीर आरोप!
ठाणे, 19 अक्टूबर 2026: दिशा सालियन के पिता सतीश सालियन द्वारा आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, संजय राउत, सुषमा अंधारे, निखिल वागले और अन्य के खिलाफ दाखिल किए गए ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे की महत्वपूर्ण प्रारंभिक सुनवाई 21 अक्टूबर को होने जा रही है। इस मामले में अब जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आया है।
विशेष दीवानी वाद क्रमांक 469/2026 ठाणे स्थित वरिष्ठ स्तर के सिविल जज की अदालत में दाखिल किया गया है। सतीश सालियन ने न्यायालय के नियमों के अनुसार आवश्यक ₹3 लाख की कोर्ट फीस जमा की है।
विशेष बात यह है कि यह राशि नागरिकों से प्रति व्यक्ति एक रुपये का सांकेतिक योगदान लेकर जनभागीदारी के माध्यम से जुटाई गई है। इसकी जानकारी सतीश सालियन के अधिवक्ता एडवोकेट तनवीर निजाम ने दी।
एडवोकेट निजाम ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल सतीश सालियन की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय के लिए खड़ी हुई जनता की लड़ाई है।
अदालत ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को न्यायाधीश पानसरे मैडम के समक्ष सूचीबद्ध की है।
जनता के सांकेतिक एक-एक रुपये के योगदान से ₹3 लाख की कोर्ट फीस; ‘यह अकेले सतीश सालियन की नहीं, जनता की लड़ाई है!’ — एडवोकेट तनवीर निजाम
इस मामले की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे के लिए आवश्यक ₹3 लाख की कोर्ट फीस आम नागरिकों की भागीदारी से जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सतीश सालियन के अधिवक्ता एडवोकेट तनवीर निजाम के अनुसार, नागरिकों से प्रति व्यक्ति एक रुपये का सांकेतिक योगदान स्वीकार करके यह राशि जुटाई गई है।
एडवोकेट निजाम ने स्पष्ट किया कि एक रुपये का योगदान केवल प्रतीकात्मक है। इसका मुख्य उद्देश्य न्याय की इस लड़ाई में आम नागरिकों की भागीदारी दर्ज कराना है। जिन नागरिकों ने एक रुपये से अधिक राशि देने की इच्छा व्यक्त की, उनसे भी अतिरिक्त राशि ससम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया।
एडवोकेट तनवीर निजाम ने कहा:
“यह लड़ाई केवल सतीश सालियन की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि जनता की लड़ाई है। न्याय के लिए चल रहे इस संघर्ष में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक रुपये का सांकेतिक योगदान निर्धारित किया गया। यह धन इकट्ठा करने का अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी के माध्यम से न्याय के लिए एकजुटता स्थापित करने का प्रयास है।”
उनके अनुसार, नागरिकों के एक-एक रुपये के योगदान से खड़ा हुआ यह कानूनी संघर्ष न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास और अन्याय के खिलाफ एकजुट होने के संकल्प का प्रतीक है।
विशेष रूप से, सतीश सालियन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस मुकदमे से वसूल होने वाली क्षतिपूर्ति की 99 प्रतिशत राशि पीड़ित महिलाओं और अन्य पीड़ित नागरिकों में वितरित की जाएगी।
21 अक्टूबर को पानसरे मैडम की अदालत में सुनवाई; जनभागीदारी से खड़े हुए ₹2,000 करोड़ के मुकदमे पर सबकी नजर!
विशेष दीवानी वाद क्रमांक 469/2026 में सतीश सालियन ने ₹2,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति की मांग की है। इसके लिए नागरिकों के सांकेतिक एक रुपये के योगदान से जमा किए गए ₹3 लाख की कोर्ट फीस भरे जाने की जानकारी एडवोकेट तनवीर निजाम ने दी।
उन्होंने स्पष्ट किया:
“एक रुपया केवल सांकेतिक सहायता है। इससे अधिक राशि ससम्मान अस्वीकार की गई है, क्योंकि यह लड़ाई पैसे के लिए नहीं, बल्कि न्याय के लिए और जनता की भागीदारी से लड़ी जा रही है।”
अब 21 अक्टूबर को न्यायाधीश पानसरे मैडम की अदालत में होने वाली प्रारंभिक सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
हाईकोर्ट के आदेश और सबूत होने के बावजूद बदनामी का अभियान; सतीश सालियन का गंभीर आरोप!
सतीश सालियन के मुकदमे के अनुसार, दिशा सालियन प्रकरण में उनके पास महत्वपूर्ण सबूत उपलब्ध हैं। इसके अलावा, हाईकोर्ट के आदेश मौजूद होने के बावजूद कुछ राजनीतिक नेताओं और संबंधित व्यक्तियों ने जानबूझकर उनकी बदनामी करने का प्रयास किया।
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि न्याय के लिए सतीश सालियन द्वारा शुरू की गई लड़ाई को बदनाम करने के उद्देश्य से झूठी और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित की गई, एकतरफा खबरें फैलाई गईं और उनके कानूनी संघर्ष को ‘राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित’ बताने का नैरेटिव चलाया गया।
उनकी विश्वसनीयता कम करना, जनता के बीच उनके बारे में गलतफहमियां पैदा करना और न्यायालयीन संघर्ष को राजनीतिक रंग देना इस प्रचार का उद्देश्य था, ऐसा आरोप मुकदमे में लगाया गया है।
इन्हीं कारणों से उन्होंने संबंधित प्रतिवादियों के खिलाफ ₹2,000 करोड़ का मानहानि मुकदमा दाखिल किया है।
क्षतिपूर्ति की 99 प्रतिशत राशि पीड़ित महिलाओं और नागरिकों के लिए!
सतीश सालियन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस मुकदमे से वसूल होने वाली क्षतिपूर्ति की राशि में से 99 प्रतिशत रकम पीड़ित महिलाओं और अन्य पीड़ित नागरिकों में वितरित की जाएगी।
इसलिए इस मुकदमे का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति प्राप्त करना नहीं, बल्कि न्याय के लिए संघर्ष कर रहे पीड़ितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी है, ऐसा बताया गया है।
वास्तव में कितनी क्षतिपूर्ति मंजूर होगी और कितनी राशि वसूल की जा सकेगी, यह अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी, संपत्ति कुर्की और सिविल जेल भेजने की मांग!
सतीश सालियन ने इस मुकदमे में प्रतिवादियों के खिलाफ कठोर अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की है।
इन मांगों में कथित मानहानिकारक खबरें, वीडियो, साक्षात्कार और सोशल मीडिया सामग्री हटाना, उनके दोबारा प्रसारण पर रोक लगाना, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखना तथा संभावित क्षतिपूर्ति की राशि सुरक्षित करने के लिए ₹2,000 करोड़ की बैंक गारंटी अथवा संपत्ति की सुरक्षा और कुर्की के आदेश जारी करना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, आवश्यक सुरक्षा या बैंक गारंटी नहीं देने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार प्रतिवादियों को सिविल जेल भेजने की मांग भी की गई है।
हालांकि, केवल बैंक गारंटी नहीं देने के कारण सिविल जेल भेजने का आदेश स्वतः नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के संबंधित प्रावधानों, आवश्यक कानूनी शर्तों और न्यायालय के आदेश का पालन आवश्यक है।
इन सभी मांगों पर अदालत का निर्णय अभी बाकी है।
21 अक्टूबर को प्रतिवादी गैरहाजिर रहे तो आगे क्या होगा?
सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार, अदालत में मुकदमा दाखिल होने के बाद प्रतिवादियों को न्यायालय द्वारा समन जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इसी प्रकार, अस्थायी निषेधाज्ञा के लिए दाखिल एक्जिबिट-5 (Exhibit-5) आवेदन पर अदालत आवश्यकता के अनुसार प्रतिवादियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है।
इस नोटिस के माध्यम से प्रतिवादियों से पूछा जाता है कि उनके खिलाफ मांगी गई अस्थायी निषेधाज्ञा क्यों न मंजूर की जाए।
प्रतिवादी या उनके अधिकृत वकील अदालत में उपस्थित होकर समन और नोटिस स्वीकार कर सकते हैं। इससे उनके निवास स्थान पर न्यायालय के अधिकारी को भेजने की आवश्यकता टल सकती है।
लेकिन यदि समन स्वीकार नहीं किए जाते और अदालत औपचारिक तामील का आदेश देती है, तो न्यायालय का अधिकारी (बेलिफ) संबंधित प्रतिवादियों के निवास स्थान या कानूनी सेवा-पते पर जाकर समन की तामील कर सकता है।
‘मातोश्री’ पहुंचेगा बेलिफ? संजय राउत, सुषमा अंधारे और निखिल वागले के घर भी पहुंचेगा न्यायालय का अधिकारी?
यदि अदालत समन जारी करके बेलिफ के माध्यम से तामील करने का निर्देश देती है, तो आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे के संबंधित पते पर, जिसमें ‘मातोश्री’ भी शामिल हो सकता है, तथा संजय राउत, सुषमा अंधारे, निखिल वागले और अन्य प्रतिवादियों के निवास स्थान या कानूनी सेवा-पते पर न्यायालय का अधिकारी (बेलिफ) जा सकता है।
कई दीवानी मामलों में प्रतिवादियों के वकील स्वयं अदालत में उपस्थित होकर समन स्वीकार कर लेते हैं। इससे बेलिफ को उनके घर जाकर समन की तामील करने की आवश्यकता नहीं रहती।
अब सवाल यह है कि ठाकरे और अन्य प्रतिवादियों के वकील 21 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होकर समन स्वीकार करेंगे या न्यायालय के अधिकारी को उनके निवास स्थान पर भेजने की नौबत आएगी।
सतीश सालियन की ओर से चार अधिवक्ताओं सहित कानूनी टीम करेगी जोरदार बहस!
इस बहुचर्चित मामले में सतीश सालियन की ओर से एडवोकेट तनवीर निजाम, एडवोकेट ईश्वरलाल अग्रवाल, एडवोकेट अनुष्का सोनावणे, एडवोकेट पायल पडवळ और अन्य अधिवक्ता अदालत में बहस करेंगे।
प्रतिवादियों के खिलाफ दाखिल ₹2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे, मानहानिकारक प्रकाशनों पर रोक, बैंक गारंटी, संपत्ति कुर्की और अन्य अंतरिम मांगों के संबंध में यह कानूनी टीम अदालत के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करेगी।
21 अक्टूबर को पानसरे मैडम की अदालत में क्या होगा? ‘मातोश्री’ पहुंचेगा बेलिफ या ठाकरे खुद समन स्वीकार करेंगे?
विशेष दीवानी वाद Special Civil Suit क्रमांक 469/2026 में सतीश सालियन ने ₹2,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति की मांग की है। इसके लिए जनभागीदारी से जमा किए गए ₹3 लाख की कोर्ट फीस भरे जाने की जानकारी दी गई है।
हाईकोर्ट के आदेश और उपलब्ध सबूत होने के बावजूद झूठी खबरें, एकतरफा रिपोर्टिंग और राजनीतिक उद्देश्य का प्रचार करके उनकी बदनामी किए जाने का आरोप मुकदमे में लगाया गया है।
“यह लड़ाई अकेले सतीश सालियन की नहीं, बल्कि जनता की लड़ाई है,” ऐसी भूमिका एडवोकेट तनवीर निजाम ने व्यक्त की है।
21 अक्टूबर को न्यायाधीश पानसरे मैडम की अदालत में होने वाली प्रारंभिक सुनवाई में न्यायालय क्या निर्देश देता है, प्रतिवादियों की ओर से कौन उपस्थित होता है और समन की तामील के संबंध में कौन-सी प्रक्रिया निर्धारित की जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
आदित्य ठाकरे और अन्य प्रतिवादी अदालत में ही समन स्वीकार करेंगे या न्यायालय का अधिकारी (बेलिफ) सीधे ‘मातोश्री’ सहित उनके निवास स्थानों पर पहुंचेगा?
21 अक्टूबर की सुनवाई के बाद इस संबंध में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है!