₹50 लाख की कथित रिश्वत देने के मामले में शाह रुख–आर्यन, NCB और CBI अधिकारियों पर FIR की मांग – PIL पर सोमवार को चीफ जस्टिस बेंच के सामने हाई-प्रोफाइल सुनवाई

CBI–NCB खुद अपने ही जाल में फंसी?

💥 “रिश्वत दी ही नहीं” — शाहरुख-आर्यन पक्ष का दावा… फिर भी वानखेड़े पर रिश्वत लेने की FIR!

ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश करने का कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को इनाम’ — निशाने पर वानखेड़े: मुंबई से बाहर ट्रांसफर, बदनामी और झूठे केस में फँसाया गया 

[CRPIL (ST) No. 10580 of 2023 — राशिद खान पठान बनाम शाह रुख खान व अन्य]

 असल कहानी यह है कि NCB के तत्कालीन ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के नेतृत्व में, सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण से जुड़े कथित ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच के दौरान रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया था।

जांच आगे बढ़ने पर रिया चक्रवर्ती, आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया आदि से जुड़े कथित नेटवर्क की परतें खुलने लगीं, जिसके बाद कथित ड्रग माफिया ने अवैध वसूली में लिप्त बताए जाने वाले कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम को प्रभावित करने की योजना बनाई. एक कठोर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने प्रभावशाली तंत्र को चुनौती दी थी। उन्हें बदनाम करने, पद से हटाने और कानूनी उलझनों में फँसाने का प्रयास किया गया, ताकि पूरी जांच की दिशा ही बदल दी जाए।

यह केवल व्यक्तिगत कार्रवाई नहीं, बल्कि उस अधिकारी को निष्क्रिय करने की कोशिश थी जिसने कथित रूप से ड्रग नेटवर्क और प्रभावशाली हितों को चुनौती दी थी।समीर वानखेड़े के नेतृत्व में, सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण से जुड़े कथित ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच के दौरान रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के न्यायिक पीठ द्वारा पारित आदेश ने मुंबई से श्री समीर वानखेड़े के कथित अवैध तबादले के मामले में एनसीबी के कुछ अधिकारियों की दुर्भावनापूर्ण मंशा (माला फाइड) को उजागर कर दिया है।  

मुंबई / नई दिल्ली: बॉलीवुड सुपरस्टार शाह रुख खान, उनके बेटे आर्यन खान और मैनेजर पूजा ददलानी से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है और मामला बॉम्बे हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस बेंच तक पहुंच गया है। इस हाई-प्रोफाइल जनहित याचिका पर सोमवार, 23 फरवरी 2026 को सुनवाई निर्धारित है। यह मामला सूची में सीरियल नंबर 220 पर “कैटेगरी-A” में दर्ज है तथा सुनवाई प्रातः 11 बजे से प्रारम्भ होने की संभावना है।  याचिकाकर्ता राशिद खान पठान की ओर से इंडियन बार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता निलेश ओझा,  मामले की पैरवी कर रहे हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब एनसीबी की रिपोर्ट और सीबीआई की एफआईआर स्वयं यह संकेत देती हैं कि चर्चित ड्रग-क्रूज़ प्रकरण के दौरान आर्यन खान को बचाने के लिए तत्कालीन एनसीबी अधिकारी समीर वानखेड़े को ₹50 लाख की कथित रिश्वत दी गई थी, तो रिश्वत देने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत शाह रुख खान, आर्यन खान और पूजा ददलानी को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि जांच अभिलेखों में रिश्वत देने का उल्लेख है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई न होना गंभीर कानूनी विसंगति को दर्शाता है और इसकी न्यायिक जांच आवश्यक है।

साक्ष्यों के अवलोकन से यह प्रतीत होता है कि समीर वानखेड़े ने उक्त प्रकरण में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी एवं निष्पक्षता के साथ निर्वहन किया, जिसके परिणामस्वरूप आर्यन खान को लंबे समय तक जमानत प्राप्त नहीं हो सकी। इसके अतिरिक्त, अन्य मामलों में भी — जिनमें दीपिका पादुकोण जैसी कई प्रमुख बॉलीवुड हस्तियों से जुड़े प्रकरणों की जांच शामिल बताई जाती है — वानखेड़े द्वारा की जा रही कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई के कारण यह पूरा विषय अत्यंत संवेदनशील और व्यापक रूप से चर्चित हो गया।

इस मामले से कथित रूप से भारी आर्थिक लाभ की अपेक्षा रखने वाले एनसीबी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने परिस्थितियों को प्रभावित करने का प्रयास किया और इसी संदर्भ में एक जाल बिछाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सितंबर 2020 में NCB के तत्कालीन ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के नेतृत्व में, सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण से जुड़े कथित ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच के दौरान रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के बाद मुंबई के हाई-प्रोफाइल ड्रग सर्किट में भूचाल आ गया और कई प्रभावशाली नामों को लेकर सनसनी फैल गई।

बताया जाता है कि इस जांच में रिया चक्रवर्ती, आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया आदि से जुड़े कथित नेटवर्क की परतें खुलने लगी थीं, जिससे सत्ता-प्रभाव वाले हलकों में बेचैनी बढ़ गई। इसी क्षण से समीर वानखेड़े शक्तिशाली लॉबी के निशाने पर आ गए और व्यवस्था के लिए “असुविधाजनक अधिकारी” बन गए। यदि जांच को उनके नेतृत्व में निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने दिया जाता, तो कथित तौर पर कई बड़े नाम और संगठित तंत्र उजागर हो सकते थे। इसके बाद उन्हें पद से हटाने, बदनाम करने और कानूनी उलझनों में फँसाने के लिए व्यवस्थित अभियान चलाए जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, ताकि जांच की दिशा ही बदल दी जाए। ड्रग माफिया, भ्रष्ट नारकोटिक्स अधिकारी, ड्रग नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली तत्व, उनके राजनीतिक-आर्थिक संरक्षक और कथित रूप से भ्रष्ट तंत्र — सभी ने मिलकर वानखेड़े को निष्क्रिय करने की रणनीति बनाई। यह केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं थी, बल्कि उस जांच को कमजोर करने का प्रयास था जिसने कथित तौर पर ड्रग माफिया, भ्रष्ट नारकोटिक्स अधिकारी— और सत्ता-पैसा-प्रभाव के गठजोड़ को खुली चुनौती दी थी।

👉 इसलिए इसे एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि सच को दबाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

CBI–NCB खुद अपने ही जाल में फंसी?

एक ओर शाहरुख खान, आर्यन खान और पूजा ददलानी की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि कोई रिश्वत दी ही नहीं गई, वहीं दूसरी ओर समीर वानखेड़े के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज कर दिया गया।

👉 सबसे बड़ा सवाल —

💥 “कोई रिश्वत दी ही नहीं गई,… तो रिश्वत ली कैसे?”

 

 सवालों की झड़ी

🔹 यदि रिश्वत दी ही नहीं गई —
➡️ तो रिश्वत लेने का मामला कैसे बना?

🔹 और यदि रिश्वत दी गई —
➡️ तो देने वालों पर केस क्यों नहीं?

एजेंसियों के दावों में बड़ा विरोधाभास?

एनसीबी की रिपोर्ट और सीबीआई की एफआईआर में कथित तौर पर कहा गया है कि ₹50 लाख की रकम बिचौलियों के माध्यम से समीर वानखेड़े तक पहुंचाई गई। आरोप है कि यह राशि शाह रुख खान के पक्ष से, उनकी निजी सचिव पूजा ददलानी के जरिए भेजी गई।

लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि —

👉 रिश्वत लेने के आरोप में कार्रवाई हुई
👉 मगर कथित रिश्वत देने वालों पर कोई केस नहीं

🚨 कानून के तहत दोनों दोषी होते हैं

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8-A और 12 के अनुसार —

💥 रिश्वत देना भी उतना ही अपराध है जितना रिश्वत लेना।

👉 ऐसे में एकतरफा कार्रवाई ने पूरे मामले को और ज्यादा विवादित बना दिया है।

 🔥 कहानी कुछ और है?

🏛️ CAT आदेश का भी हवाला

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के न्यायिक पीठ द्वारा पारित आदेश ने मुंबई से श्री समीर वानखेड़े के कथित अवैध तबादले के मामले में एनसीबी के कुछ अधिकारियों की दुर्भावनापूर्ण मंशा (माला फाइड) को उजागर कर दिया है।   

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) द्वारा पारित आदेश से भी यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि मुंबई से समीर वानखेड़े के स्थानांतरण के मामले में एनसीबी के कुछ अधिकारियों की भूमिका दुर्भावनापूर्ण तथा संदिग्ध थी। अधिकरण के निष्कर्षों के अनुसार यह स्थानांतरण किसी वैध या तात्कालिक प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित नहीं था, बल्कि नियमों की अवहेलना करते हुए अनुचित तरीके से किया गया प्रतीत होता है।

अधिकरण ने यह भी संकेत दिया कि इस निर्णय के पीछे प्रशासनिक कारणों से अधिक अन्य प्रभाव कार्यरत थे। परिणामस्वरूप, इस स्थानांतरण को विधि-सम्मत न मानते हुए अधिकरण ने इसे निरस्त (रद्द) कर दिया।

🧑‍🤝‍🧑 जनता में भी तीखी प्रतिक्रिया :- इस मामले ने आम जनता में व्यापक और तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। बड़ी संख्या में आम नागरिकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समीर वानखेड़े के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है और आरोप लगाया है कि उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई बाहरी दबावों के कारण की गई।

समर्थकों का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम शक्तिशाली ड्रग नेटवर्क के दबाव में अंजाम दिया गया, क्योंकि समीर वानखेड़े कथित रूप से उस नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कार्रवाई कर रहे थे और उसे जड़ से उखाड़ने के प्रयास में थे।

🚨 अब सबकी नजर सोमवार की सुनवाई पर

चीफ जस्टिस की बेंच के सामने होने वाली यह सुनवाई न केवल हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के लिए, बल्कि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकती है।

सोमवार की सुनवाई से कई बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं।

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