हाई कोर्ट के आदेश से वडाला रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार बहाल — गोदरेज को बड़ा झटका, अरबों रुपये का प्रोजेक्ट हाथ से गया

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद वडाला के बहु-अरब रुपये के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार फिर से बहाल हो गए हैं, जिससे गोदरेज कंपनी को बड़ा झटका लगा है।

एडवोकेट निलेश ओझा की कानूनी रणनीति से छह वर्ष बाद पलटा मामला।

बताया जा रहा है कि गोदरेज द्वारा दस अरब रुपये से अधिक खर्च करके निर्मित की गई इमारत अब ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के नियंत्रण में आ गई है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद इस पूरे मामले में गोदरेज की स्थिति पूरी तरह कमजोर पड़ गई है।

सोसायटी सदस्यों को दुहरा लाभ।

हाई कोर्ट के निर्णय के बाद आजाद नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के सदस्यों को दुहरा लाभ मिलने की संभावना बनी है।

गोदरेज द्वारा बनाए गए फ्लैट अब ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के माध्यम से सोसायटी सदस्यों को दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स द्वारा पहले से वादा किए गए अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी सोसायटी सदस्यों को प्राप्त होंगे।

एडवोकेट निलेश ओझा की कानूनी रणनीति से छह वर्ष बाद पलटा मामला।

बताया जा रहा है कि अधिवक्ता निलेश ओझा की प्रभावी कानूनी रणनीति के कारण लगभग छह वर्षों बाद पूरे मामले का रुख बदल गया।

न्यायालय द्वारा पारित यह आदेश सोसायटी सदस्यों की सहमति से पारित किया गया, और इस पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई, जबकि इस मामले में BMC एक वैधानिक प्रतिवादी थी।

गोदरेज पर संभावित कानूनी कार्रवाई की चर्चा।

इस घटनाक्रम के बाद अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि गोदरेज कंपनी के खिलाफ झूठे शपथपत्र (Perjury), जालसाजी (Forgery) और भारी नुकसान भरपाई के दावे किए जा सकते हैं।

गोदरेज को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका

हाई कोर्ट के निर्णय के बाद गोदरेज कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।

अरबों रुपये का प्रोजेक्ट उसके हाथ से निकल गया है और BMC की शर्तों के अनुसार परियोजना पर किए गए लगभग ₹1000 करोड़ से अधिक खर्च को वापस मांगना भी संभव नहीं होगा।

दरअसल, जब गोदरेज को इस परियोजना में प्रवेश की अनुमति दी गई थी, तब BMC ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी थी कि यह अनुमति बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम परिणाम के अधीन (subject to the outcome of the High Court proceedings) होगी।

अर्थात यदि अंतिम निर्णय गोदरेज के पक्ष में नहीं आता, तो उस आधार पर की गई निवेश राशि के लिए कंपनी कोई वैधानिक दावा नहीं कर सकती।

“अपनी जोखिम पर निवेश” माना जाएगा।

कानून के अनुसार, जब कोई पक्ष न्यायालय में मामला लंबित रहते हुए बड़े पैमाने पर निवेश करता है, तो उसे “अपनी जोखिम पर किया गया निवेश” (working at one’s own risk) माना जाता है।

इसी कारण अब गोदरेज के लिए अपनी लागत की भरपाई प्राप्त करना कठिन माना जा रहा है।

रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए बड़ा सबक

रियल एस्टेट क्षेत्र के बड़े डेवलपर्स के लिए यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी और सबक के रूप में देखा जा रहा है।

यदि कोई परियोजना न्यायालय में विचाराधीन हो और अंतिम निर्णय आने से पहले भारी निवेश कर दिया जाए, तो उससे गंभीर कानूनी और आर्थिक जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

झूठे हलफनामों और दस्तावेजों को लेकर भी चर्चा

सोसायटी सदस्यों के बीच हुई चर्चाओं से यह भी सामने आया कि कुछ सदस्यों द्वारा झूठे हलफनामे (False Affidavit) और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने को लेकर परजरी (Perjury) और जालसाजी (Forgery) की कार्रवाई की संभावना व्यक्त की जा रही थी।

इसके अतिरिक्त, पूर्व में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोदरेज बॉयस कंपनी के कुछ अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की धोखाधड़ी (fraud on court) के आरोपों पर आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए थे।

इन परिस्थितियों को देखते हुए कई सोसायटी सदस्यों ने अपनी स्थिति बदलने का निर्णय लिया।

संभावित कानूनी परिणामों के बाद बदला रुख

कानूनी सलाहकारों ने कुछ सदस्यों को यह भी बताया कि यदि किसी ने झूठे दस्तावेज, फर्जी प्रस्ताव (resolution) या गलत हलफनामे अदालत में दाखिल किए, तो उनके खिलाफ भी परजरी, जालसाजी और न्यायालय को गुमराह करने जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हो सकते हैं।

इन संभावित कानूनी परिणामों को समझने के बाद कई सदस्यों ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और अंततः गोदरेज का समर्थन छोड़कर ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार बहाल करने के पक्ष में सहमति दे दी।

प्रकरण की पृष्ठभूमि

मुंबई महानगरपालिका की स्वामित्व वाली वडाला स्थित लगभग 8.5 एकड़ भूमि पर स्थित आजाद नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के पुनर्विकास का बड़ा प्रोजेक्ट पहले ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स को दिया गया था।

इस परियोजना के लिए कंपनी ने किराया, पुनर्वसन और अन्य खर्चों सहित लगभग ₹150 करोड़ से अधिक का निवेश किया था।

हालांकि, बाद में परियोजना से जुड़े कुछ किरायेदारों ने विरोधी डेवलपर गोदरेज के साथ मिलकर अदालत में कथित रूप से भ्रामक और गलत दावे प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर कुछ आदेश प्राप्त कर इस परियोजना को ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स से हटाने का प्रयास किया गया।

इन आदेशों को ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स ने बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान सोसायटी सदस्यों के दावों में कई विसंगतियाँ और कथित झूठ सामने आने लगे। इसके बाद सोसायटी सदस्यों और याचिकाकर्ताओं के बीच चर्चा हुई और 23 जनवरी 2020 के आदेश को रद्द करके उससे पहले की स्थिति बहाल करने पर सहमति बनी।

विकास अधिकार फिर बहाल

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार 25 फरवरी 2020 तक वैध और प्रभावी थे।

इसलिए जब 23 जनवरी 2020 से पहले की स्थिति बहाल की गई, तो उनके सभी विकास अधिकार स्वतः पुनर्स्थापित हो गए।

दूसरी ओर, गोदरेज को परियोजना में प्रवेश देने वाली अनुमति 05.11.2020 को दी गई थी, वह भी स्पष्ट रूप से न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन थी।

इसलिए अब जब न्यायालय ने पूर्व स्थिति बहाल कर दी है, तो गोदरेज को मिले अधिकार स्वतः समाप्त माने जा रहे हैं।

रियल एस्टेट जगत में व्यापक चर्चा

इस निर्णय के बाद वडाला के इस बहु-करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में फिर से ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स का वर्चस्व स्थापित हो गया है, और रियल एस्टेट क्षेत्र में इस मामले की व्यापक चर्चा हो रही है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में मामला लंबित रहते हुए किया गया बड़ा निवेश “स्वयं के जोखिम पर किया गया निवेश” माना जाता है, इसलिए ऐसे मामलों में नुकसान की जिम्मेदारी भी उसी पक्ष को उठानी पड़ती है।

कुल मिलाकर, वडाला का यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है कि न्यायालयीन प्रक्रिया की अनदेखी कर परियोजना में प्रवेश करना कितना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

लेखक: आयुष तिवारी

(अंतिम वर्ष के विधि छात्र के रूप में, सोसायटी के कुछ सदस्यों के साथ निकट संपर्क होने के कारण मुझे इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने, न्यायालय की सुनवाई देखने और सोसायटी सदस्यों से चर्चा करने का अवसर मिला। इस लेख का उद्देश्य सोसायटी सदस्यों, विधि छात्रों, कनिष्ठ वकीलों, रियल एस्टेट क्षेत्र और आम नागरिकों के सामने इस मामले से जुड़े तथ्यात्मक और कानूनी प्रश्नों को स्पष्ट करना है।)

Download the order dated 12.03.2026 passed by the Division Bench.

Download the order passed by the Division Bench ordering prosecution of Directors of Godrej Boyce and Co. for fraud upon High Court.

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