2,000 करोड़ के मानहानि मुकदमे में कोर्ट के समन्स और शो-कॉज नोटिस में आदित्य ठाकरे को स्पष्ट चेतावनी—4 नवंबर को लिखित जवाब और अपने बचाव के सभी सबूत व दस्तावेज लेकर हाजिर हो, वरना गैरमौजूदगी में चलेगा मुकदमा और एकतरफा फैसला दे सकती है अदालत!

‘दावा मंजूर है तो रकम और मुकदमे का खर्च कोर्ट में जमा करो, नहीं तो अपने बचाव के सभी कागजात पेश करो!’—ठाणे कोर्ट के समन्स में स्पष्ट निर्देश!

4 नवंबर को सुबह 11 बजे स्वयं या वकील के माध्यम से पेश होने का निर्देश; गैरहाजिरी पर शो-कॉज नोटिस वाले आवेदन पर भी एकतरफा निर्णय की चेतावनी!

आदित्य ठाकरे के अलावा उद्धव ठाकरे, अनिल देशमुख, संजय राऊत, सुषमा अंधारे, अखिल चित्रे, असीम सरोदे, निखिल वागले और वरुण सरदेसाई को भी कोर्ट के सूट समन्स और शो-कॉज नोटिस जारी!

‘मातोश्री’ के पते पर जारी हुए समन्स! कोर्ट के बेलिफ द्वारा होगी विधिवत तामील; सभी नौ प्रतिवादियों को अब अदालत में देना होगा जवाब!

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की कानूनी लड़ाई तेज; मानहानिकारक पोस्ट हटाने, सार्वजनिक माफी और 2,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी सहित अंतरिम राहतों की मांग!

मुंबई/ठाणे, 22 अक्टूबर 2026।

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर 2,000 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में अब बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। ठाणे की सिविल अदालत ने आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, संजय राऊत, अनिल देशमुख सहित कुल नौ प्रतिवादियों के खिलाफ सूट समन्स (Suit Summons) और कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किए हैं।

21 अक्टूबर 2026 को जारी इन नोटिसों में प्रतिवादियों को 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे अदालत में स्वयं अथवा विधिवत निर्देश प्राप्त अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।

अदालत ने समन्स में स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित तारीख पर प्रतिवादी उपस्थित नहीं होते हैं, तो मुकदमे की सुनवाई और निर्णय उनकी अनुपस्थिति में किया जा सकता है। इसी प्रकार कारण बताओ नोटिस में संबंधित आवेदन पर एकतरफा सुनवाई और निर्णय की चेतावनी दी गई है।

विशेष बात यह है कि समन्स में प्रतिवादियों को केवल उपस्थित होने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बचाव का लिखित जवाब तथा उस बचाव के समर्थन में जिन दस्तावेजों पर वे निर्भर करना चाहते हैं, उन्हें भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

‘हाजिर नहीं हुए तो गैरमौजूदगी में चलेगा मुकदमा!’—कोर्ट की दो टूक चेतावनी

ठाणे की 10वीं संयुक्त सिविल जज, सीनियर डिवीजन, श्रद्धा सुदामराव पानसरे की अदालत ने विशेष सिविल मुकदमा क्रमांक 469/2026 में जारी समन्स में स्पष्ट रूप से लिखा है:

“Take notice that, in default of your appearance on the day before mentioned, the suit will be heard and determined in your absence.”

अर्थात, यदि प्रतिवादी निर्धारित तारीख पर अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो उसकी अनुपस्थिति में मुकदमे की सुनवाई की जा सकती है और फैसला भी दिया जा सकता है।

अलग से जारी शो-कॉज नोटिस में भी स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि प्रतिवादी को निर्धारित तारीख पर उपस्थित होकर संबंधित आवेदन का विरोध करने का अवसर दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर आवेदन की सुनवाई और निर्णय एकतरफा किया जा सकता है।

इस प्रकार कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब देने का अवसर देते हुए गैरहाजिरी के कानूनी परिणाम भी स्पष्ट कर दिए हैं।

‘लिखित जवाब के साथ अपने बचाव के सभी सबूत और कागजात पेश करो!’—समन्स में स्पष्ट निर्देश

अदालत द्वारा जारी समन्स में आदित्य ठाकरे सहित प्रतिवादियों को अपने बचाव का लिखित बयान (Written Statement) दाखिल करने के लिए कहा गया है।

समन्स के अनुसार, प्रतिवादियों को अपने कब्जे या नियंत्रण में मौजूद वे सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं, जिन पर वे अपने बचाव, सेट-ऑफ अथवा काउंटर-क्लेम के समर्थन में भरोसा करना चाहते हैं।

इसके अतिरिक्त ऐसे दस्तावेजों की सूची भी लिखित जवाब के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश है।

अब प्रतिवादियों को वादी द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में अपना पक्ष और उसके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज अदालत के समक्ष रखने होंगे।

यह मुकदमा अब केवल सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें संबंधित पक्षों के दावों, बचाव और दस्तावेजों की न्यायिक जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

‘दावा स्वीकार है तो रकम और मुकदमे का खर्च कोर्ट में जमा करो!’—समन्स में विशेष प्रावधान

न्यायालय द्वारा जारी सूट समन्स में एक और महत्वपूर्ण सूचना दर्ज है।

समन्स में लिखा गया है:

“If you admit the claim, you should pay the money into Court together with the costs of the suit.”

इसका अर्थ है कि यदि प्रतिवादी दावा स्वीकार करता है, तो वह स्वीकृत दावे की रकम तथा मुकदमे का खर्च अदालत में जमा करे, ताकि उसके विरुद्ध संभावित डिक्री के निष्पादन से बचा जा सके।

सतीश सालियान ने इस मुकदमे में 2,000 करोड़ रुपये की मानहानि संबंधी मांग उठाई है।

हालांकि, समन्स की यह शर्त दावा स्वीकार किए जाने की स्थिति से संबंधित है। अदालत ने अभी 2,000 करोड़ रुपये जमा करने का स्वतंत्र या अनिवार्य आदेश पारित नहीं किया है।

आदित्य ही नहीं, उद्धव ठाकरे समेत कुल नौ प्रतिवादियों को समन्स और शो-कॉज नोटिस!

इस मामले में केवल आदित्य ठाकरे को ही नहीं, बल्कि मुकदमे के सभी नौ प्रतिवादियों को सूट समन्स और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

इनमें आदित्य उद्धव ठाकरे, उद्धव बालासाहेब ठाकरे, अनिल देशमुख, संजय राऊत, सुषमा अंधारे, अखिल चित्रे, असीम सरोदे, निखिल वागले और वरुण सरदेसाई शामिल हैं।

इन सभी प्रतिवादियों को 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे अदालत में स्वयं अथवा अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।

प्रतिवादियों को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिखित जवाब और बचाव के दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं। अनुपस्थित रहने पर न्यायालय मुकदमे और संबंधित अंतरिम आवेदन पर कानून के अनुसार एकतरफा कार्यवाही कर सकता है।

इस प्रकार अब नौ प्रतिवादियों को अदालत की प्रक्रिया में अपने पक्ष का कानूनी बचाव करना होगा।

‘मातोश्री’ के दरवाजे तक पहुंचेगा अदालत का समन्स!

इस मुकदमे की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे, दोनों के समन्स के लिए न्यायालय के रिकॉर्ड में मातोश्री बंगला, कलानगर, बांद्रा पूर्व, मुंबई का पता दर्ज है।

न्यायालय के अधिकृत बेलिफ अथवा प्रक्रिया अधिकारी के माध्यम से समन्स की विधिवत तामील की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इसी प्रकार अन्य प्रतिवादियों के लिए भी अदालत के रिकॉर्ड में अलग-अलग पते दर्ज हैं।

संजय राऊत, सुषमा अंधारे और अखिल चित्रे के लिए शिवसेना भवन, दादर का पता समन्स सूची में दर्ज है।

मातोश्री जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पते पर अदालत का समन्स जारी होना इस मुकदमे का चर्चित पहलू बन गया है।

आखिर क्यों दायर किया गया 2,000 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा?

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान का आरोप है कि उनकी बेटी की मौत से जुड़े मामले में कुछ राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक व्यक्तियों ने उनके विरुद्ध भ्रामक, अपमानजनक तथा मानहानिकारक बयान दिए।

वादी पक्ष के अनुसार, इन बयानों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री से उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, उनके परिवार की गरिमा तथा न्याय प्राप्त करने के प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचा।

वादी पक्ष का यह भी कहना है कि दिशा सालियान की मौत की जांच और न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मुद्दों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया तथा सतीश सालियान की कानूनी लड़ाई को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताने का प्रयास किया गया।

इन्हीं आरोपों के आधार पर सतीश सालियान ने ठाणे की सिविल अदालत में 2,000 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।

सोशल मीडिया पोस्ट हटाओ, सार्वजनिक माफी मांगो और 2,000 करोड़ की बैंक गारंटी दो!

वादी पक्ष ने मुकदमे में अंतरिम राहतों की भी मांग की है।

इनमें कथित मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री हटाने, सार्वजनिक माफी मांगने तथा 2,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी अथवा अन्य उपयुक्त आर्थिक सुरक्षा उपायों की मांग शामिल है।

वादी पक्ष ने संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक और आवश्यक होने पर संपत्ति की कुर्की जैसी राहतें भी मांगी हैं।

इन मांगों पर न्यायालय को प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद कानून के अनुसार निर्णय करना है। अभी समन्स और शो-कॉज नोटिस जारी होना इन राहतों को मंजूरी दिए जाने के समान नहीं है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद अब मानहानि मुकदमे ने पकड़ी रफ्तार!

वादी पक्ष ने अपने मुकदमे में दिशा सालियान की मौत से संबंधित पूर्व पुलिस जांच, उसके संबंध में उठाए गए सवालों और बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई न्यायिक कार्यवाही का भी उल्लेख किया है।

सतीश सालियान का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय प्राप्त करने के उद्देश्य से कानूनी लड़ाई शुरू की, लेकिन उसके बाद उनके विरुद्ध कई ऐसे सार्वजनिक बयान दिए गए जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

वादी पक्ष के अनुसार, न्यायिक कार्यवाही लंबित रहने के बावजूद उनकी नीयत पर सवाल उठाना और उनके प्रयासों को बदनाम करना मानहानि के दावे का महत्वपूर्ण आधार है।

हालांकि, प्रतिवादियों के कथित बयानों की सत्यता, उनके कानूनी बचाव और मानहानि के दावे की स्वीकार्यता का अंतिम निर्णय सक्षम अदालत को करना है।

4 नवंबर को सबकी निगाहें ठाणे कोर्ट पर!

इस महत्वपूर्ण मुकदमे में सतीश सालियान की ओर से अधिवक्ता तनवीर निजाम और अधिवक्ता ईश्वरलाल अग्रवाल पैरवी कर रहे हैं।

अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे निर्धारित है।

अब देखना यह होगा कि आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे और अन्य प्रतिवादी अपने वकीलों के माध्यम से क्या जवाब दाखिल करते हैं, किन दस्तावेजों पर भरोसा करते हैं और अंतरिम राहतों के आवेदन का किस आधार पर विरोध करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने अपने समन्स और शो-कॉज नोटिस में गैरहाजिरी के परिणाम साफ कर दिए हैं—प्रतिवादी अनुपस्थित रहे तो न्यायालय कानून के अनुसार उनकी गैरमौजूदगी में सुनवाई और निर्णय कर सकता है।

लोकतंत्र में कानून के सामने सब समान हैं। चाहे राजनीतिक पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, न्यायालय की प्रक्रिया में प्रत्येक पक्ष को कानून के अनुसार जवाब देना होता है।

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