न्यायिक, पुलिस और प्रशासनिक सुधार के लिए देशव्यापी अभियान, मुंबई में जुटेंगे एक हजार प्रतिनिधि

राष्ट्रीय संविधान रक्षा समिति की पहल; नीलेश ओझा बोले—सिर्फ समस्याएं नहीं गिनाएंगे, समाधान और उसे लागू करने की कार्ययोजना भी देश के सामने रखेंगे

पूर्व सैन्य अधिकारियों, RAW-IB से जुड़े पूर्व अधिकारियों, पूर्व न्यायाधीशों व IPS अधिकारियों से लेकर वकील, पत्रकार, डॉक्टर, मानवाधिकार-RTI कार्यकर्ता, मजदूर, व्यापारी, महिलाएं, युवा, Gen-Z Lawyers Association के युवा अधिवक्ता और आम नागरिक होंगे शामिल

मुंबई। न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार को लेकर राष्ट्रीय संविधान रक्षा समिति देशव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत मुंबई में करीब एक हजार चयनित प्रतिनिधियों का विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के बाद अभियान को राज्यों, जिलों और शहरों तक विस्तार देने के साथ देशव्यापी सदस्यता मुहिम भी शुरू की जाएगी।

समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता नीलेश सी. ओझा ने बताया कि प्रस्तावित अभियान का केंद्र आम नागरिक होगा। इसका उद्देश्य न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी, भ्रष्टाचार, जवाबदेही की कमी और व्यवस्था से जुड़ी अन्य बुनियादी समस्याओं का अध्ययन कर उनके व्यावहारिक समाधान सामने रखना है।

ओझा ने कहा, “देश में समस्याएं बताने वालों की कमी नहीं है। हमारा प्रयास प्रत्येक समस्या के साथ उसका व्यावहारिक समाधान और उसे लागू करने की स्पष्ट कार्ययोजना देश के सामने रखना है। हमारा मॉडल होगा—Problem + Solution + Action.”

पूर्व सैन्य, खुफिया, न्यायिक और पुलिस अधिकारियों का भी सहयोग

ओझा के अनुसार, समिति के साथ एक कोर कमेटी भी जुड़ी हुई है, जिसमें भारतीय सेना एवं अन्य रक्षा सेवाओं के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी, RAW और Intelligence Bureau (IB) से जुड़े पूर्व एवं सेवानिवृत्त अधिकारी, पूर्व न्यायाधीश, पूर्व IPS एवं वरिष्ठ पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, अनुभवी विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि ये लोग अब तक अपने अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर समिति को सुझाव एवं मार्गदर्शन देते रहे हैं। प्रस्तावित देशव्यापी अभियान में उनका सहयोग अब अधिक संगठित रूप से लिया जाएगा।

एक मंच पर आएंगे समाज के अलग-अलग वर्ग

मुंबई में प्रस्तावित सम्मेलन में केवल कानून और प्रशासन से जुड़े लोगों को ही नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है।

समिति के मुताबिक इसमें वकील, पत्रकार, डॉक्टर, मानवाधिकार कार्यकर्ता, RTI कार्यकर्ता, मजदूर एवं श्रमिक वर्ग, व्यापारी, महिलाएं, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, Gen-Z Lawyers Association के युवा अधिवक्ता और आम नागरिक भी शामिल होंगे।

‘आम आदमी को न्याय के लिए वर्षों तक क्यों भटकना पड़े?’

ओझा ने कहा कि अभियान का मूल प्रश्न यह है कि एक सामान्य नागरिक को अपने वैधानिक अधिकार या न्याय के लिए वर्षों तक क्यों भटकना पड़े।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए जिसमें आम नागरिक को बिना भ्रष्टाचार, भेदभाव और अनावश्यक विलंब के न्याय मिले, नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो और ईमानदार अधिकारियों को भी निर्भय होकर काम करने का वातावरण मिले।

समिति का कहना है कि कानून की प्रक्रिया गरीब, आम आदमी और प्रभावशाली व्यक्ति—सभी के लिए समान होनी चाहिए।

भ्रष्टाचार पर ‘Zero Tolerance’

भ्रष्टाचार के प्रति ‘Zero Tolerance’ अभियान के प्रमुख विषयों में रहेगा।

ओझा के अनुसार, अधिकारी, पुलिसकर्मी, नौकरशाह अथवा न्यायिक पदाधिकारी—कोई भी व्यक्ति यदि भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग या गंभीर कदाचार का दोषी विधि के अनुसार पाया जाता है तो उसके पद अथवा प्रभाव की परवाह किए बिना उसके खिलाफ शीघ्र और कानूनसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य किसी संस्था को कमजोर करना नहीं, बल्कि न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन को अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

युवाओं और महिलाओं को अभियान से जोड़ने पर जोर

समिति की योजना इस अभियान को केवल विशेषज्ञों तक सीमित न रखकर आम लोगों की भागीदारी वाला अभियान बनाने की है। इसके लिए युवा और महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा।

कानूनी क्षेत्र की नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए Gen-Z Lawyers Association के युवा अधिवक्ताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

मुंबई के बाद राज्यों और जिलों तक विस्तार

ओझा ने बताया कि मुंबई सम्मेलन के बाद राष्ट्रीय संविधान रक्षा समिति की संगठनात्मक इकाइयों का राज्य, जिला और शहर स्तर तक विस्तार किया जाएगा।

इसके साथ देशव्यापी सदस्यता अभियान शुरू करने की तैयारी है। समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर सदस्यता आवेदन के साथ अभियान के सुधार प्रस्ताव, अध्ययन सामग्री, कार्यक्रम और आगे की कार्ययोजना सार्वजनिक की जाएगी।

‘Problem + Solution + Action’ बनेगा अभियान का आधार

समिति का कहना है कि न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का अध्ययन किया जा चुका है और कई विषयों पर सुधार के प्रारूप भी तैयार किए गए हैं।

इन विषयों को एक-एक करके जनता के सामने रखा जाएगा। प्रत्येक विषय में समस्या, उसका प्रस्तावित समाधान और क्रियान्वयन की कार्ययोजना साथ रखी जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ संवाद, जनजागरण, विधिक पहल और आवश्यकता के अनुसार शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक जनआंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

ओझा ने कहा, “हमारा उद्देश्य व्यवस्था से टकराव नहीं, व्यवस्था में सुधार है। ईमानदार अधिकारी का सम्मान और संरक्षण होना चाहिए, लेकिन भ्रष्टाचार या सत्ता के दुरुपयोग के मामले में कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।”

समिति ने अभियान के प्रमुख संदेश के रूप में कहा है—

“कानून के आगे सब समान — कानून की प्रक्रिया भी सबके लिए समान।”

“आम नागरिक को शीघ्र न्याय — बिना भ्रष्टाचार, बिना भेदभाव।”

“नागरिक का सम्मान — ईमानदार अधिकारी का सम्मान।”

“देश चलेगा संविधान से — किसी व्यक्ति, पद या प्रभाव से नहीं।”

“संविधान सर्वोपरि — कानून सबके लिए समान — न्याय प्रत्येक नागरिक का अधिकार।”

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