2 हजार करोड़ रुपये के हर्जाने के मुकदमे के लिए सतीश सालियन ने न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक कोर्ट फीस जमा की!
कानूनी नोटिस देने के बावजूद बदनामी जारी रखने का आरोप; प्रतिवादियों की संपत्ति कुर्क करने, बैंक गारंटी जमा करवाने और कानूनी शर्तों के अनुसार सिविल जेल भेजने की मांग!
संजय राउत, अनिल देशमुख, सुषमा अंधारे, अखिल चित्रे, असीम सरोदे और निखिल वागले भी प्रतिवादियों में शामिल; आदित्य ठाकरे के कथित झूठे बयानों की पोल खोलने वाले सबूत मुकदमे में पेश; हाईकोर्ट के आदेशों और महत्वपूर्ण सबूतों को छिपाकर अधूरी एवं झूठी खबरों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू के जरिए जनता को गुमराह करने तथा दिशा सालियन के पिता की जानबूझकर मानहानि करने का गंभीर आरोप!
मुकदमे में बड़ा ऐलान! हर्जाने के रूप में वसूल होने वाली रकम का 99 प्रतिशत हिस्सा गरीबों तथा पुलिस अत्याचार, सरकारी तंत्र की ज्यादतियों और अन्याय के शिकार नागरिकों की सहायता के लिए सरकारी कोष में जमा करने का संकल्प!
अपने लिए केवल 1 प्रतिशत, पीड़ितों के कल्याण के लिए 99 प्रतिशत! सतीश सालियन ने मुकदमे में सामाजिक न्याय और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई!
ठाणे | विशेष संवाददाता
दिशा सालियन की मौत के मामले में न्याय के लिए संघर्ष कर रहे उनके पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे समेत आठ लोगों के खिलाफ 2 हजार करोड़ रुपये के हर्जाने का दीवानी मुकदमा दायर करने की जानकारी दी है। मुकदमे में गंभीर आरोप लगाया गया है कि कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रतिवादियों ने मानहानिकारक बयान वापस लेने के बजाय बार-बार झूठे और भ्रामक आरोप सार्वजनिक किए।
इस मुकदमे में केवल हर्जाने की ही नहीं, बल्कि प्रतिवादियों की संपत्तियों का विवरण मंगवाकर आवश्यकता पड़ने पर फैसला आने से पहले उनकी संपत्ति कुर्क करने, 2 हजार करोड़ रुपये की बैंक गारंटी अथवा अन्य पर्याप्त सुरक्षा जमा करवाने तथा सिविल प्रक्रिया संहिता की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर संबंधित प्रतिवादियों के विरुद्ध सिविल जेल संबंधी आदेश पारित करने की भी मांग की गई है।
आदित्य ठाकरे के झूठे बयानों के सबूत मुकदमे में पेश!
मुकदमे में आदित्य ठाकरे द्वारा दिशा सालियन मामले में दिए गए विभिन्न सार्वजनिक बयानों के कथित रूप से झूठे और परस्पर विरोधाभासी होने के संबंध में विस्तृत सबूतों का उल्लेख किया गया है।
विशेष रूप से रिया चक्रवर्ती से परिचय नहीं होने का सार्वजनिक दावा, 8 जून 2020 की रात अपने ठिकाने के संबंध में दिया गया कथित स्पष्टीकरण, मोबाइल टावर लोकेशन, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की जांच से संबंधित कथित इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का हवाला दिया गया है।
हाईकोर्ट के आदेशों के महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर जनता को गुमराह करने का आरोप!
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि उच्च न्यायालय के आदेश में दर्ज महत्वपूर्ण टिप्पणियों और जांच से संबंधित सबूतों की अनदेखी करते हुए प्रतिवादियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस, इंटरव्यू और सोशल मीडिया के माध्यम से अधूरी, गलत और भ्रामक जानकारी प्रसारित की।
मुकदमे के अनुसार, सतीश सालियन की न्याय के लिए जारी लड़ाई को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताकर उनकी ईमानदारी, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता पर हमला किया गया।
कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद मानहानि रोकने के बजाय उसे जारी रखने के कारण हर्जाने की मांग बढ़ाकर 2 हजार करोड़ रुपये किए जाने की बात मुकदमे में कही गई है।
इसके साथ ही संबंधित मानहानिकारक वीडियो, प्रेस कॉन्फ्रेंस, इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने तथा भविष्य में ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति रोकने के आदेश जारी करने की भी मांग की गई है।
अब इस 2 हजार करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे पर अदालत क्या फैसला सुनाती है और संबंधित प्रतिवादी अपना क्या पक्ष रखते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।