सर्वोच्च न्यायालय व मुंबई उच्च न्यायालयाची ऐतिहासिक चूक  [भाग–1]- सहा निरपराधांना फाशी – दहा वर्षांनी सर्वोच्च न्यायालयाच्या वरिष्ठ पीठाकडून मृत्युदंड रद्द, निर्दोष मुक्तता व   ₹30 लाख नुकसानभरपाईचे आदेश [अंकुश मारुती शिंदे विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य (2019) 15 SCC 470]

भारतीय फौजदारी न्यायव्यवस्था या मूलभूत तत्त्वावर उभी आहे की “100 आरोपी सुटले तरी चालतील, परंतु कोणत्याही निरपराध व्यक्तीला शिक्षा होता कामा नये.” तरीसुद्धा अंकुश मारुती […]

सर्वोच्च न्यायालय और मुंबई उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक भूल [भाग–1] – छह निर्दोषों को फाँसी की सज़ा – दस वर्ष बाद सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ पीठ द्वारा मृत्युदंड रद्द, निर्दोष मुक्ति और ₹30 लाख मुआवज़े के आदेश (अंकुश मारुति शिंदे बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2019) 15 SCC 470)

भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली इस मूलभूत सिद्धांत पर आधारित है कि “भले ही सौ अपराधी छूट जाएँ, परंतु एक भी निर्दोष को दंडित नहीं किया […]

दिशा सालियन प्रकरणातून उच्च न्यायालयाच्या न्यायमूर्तींनी स्वतःला बाजूला घेतले

दिशा सालियनच्या सामूहिक बलात्कार व हत्या प्रकरणातील सुरू असलेल्या कार्यवाहीदरम्यान एक महत्त्वपूर्ण घडामोड समोर आली आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाचे न्यायमूर्ती संदेश पाटील यांनी या प्रकरणाची […]

दिशा सालियान मामले से हाई कोर्ट जज ने स्वयं को अलग किया

दिशा सालियान के कथित गैंगरेप और हत्या से संबंधित चल रही न्यायिक कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश […]