गोदरेज वडाला प्रोजेक्ट पर कानूनी तूफान: MCGM अधिकारियों पर हाईकोर्ट अवमानना कार्रवाई का खतरा; DSK Legal को नोटिस कि वे MahaRERA के समक्ष दाखिल  झूठे और भ्रामक टाइटल सर्टिफिकेट को तत्काल वापस लें; MahaRERA में पंजीकरण रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई की मांग- 

29 अप्रैल 2026 का आदेश — गोदरेज के लिए बड़ा झटका

बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 29 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश सुनाया जिसे गोदरेज के लिए करारा झटका माना जा रहा है। इस आदेश के बाद गोदरेज का RERA पंजीकरण और तमाम अन्य सरकारी अनुमतियां रद्द होने का रास्ता साफ हो गया है — क्योंकि ये सभी अनुमतियां कथित तौर पर झूठे बयानों और गलत जानकारी देकर हासिल की गई थीं।

कोर्ट ने साफ कहा — धोखे से मिली बिल्डिंग प्रोजेक्ट की अनुमति खारिज होगी

झलक कंस्ट्रक्शंस बनाम उल्हासनगर नगर निगम (2026:BHC-AS:20511-DB) मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक बार फिर साफ कर दिया कि धोखाधड़ी, तथ्य छुपाने या गलत बयानबाजी से हासिल की गई बिल्डिंग प्रोजेक्ट की कोई भी अनुमति या मंजूरी खारिज मानी जाएगी — वह शुरू से ही शून्य और अमान्य होगी। कोर्ट ने यह भी दो टूक कह दिया कि सिर्फ इसलिए कि करोड़ों रुपये लग चुके हैं या निर्माण आगे बढ़ चुका है — इस दलील पर डेवलपर्स को कोई राहत नहीं मिलेगी। यह फैसला गोदरेज के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं — क्योंकि अब उनकी हर अनुमति और हर मंजूरी कानूनी संकट में है।

हाई कोर्ट ने पहले गोदरेज एंड बॉयस के विरुद्ध जालसाजी करने, झूठे साक्ष्य देने और करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व की चोरी हेतु हाई कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करने के लिए आपराधिक अभियोजन का आदेश दिया था।

[(Godrej & Boyce Manufacturing Co. Pvt. Ltd. v. Union of India, 1992 Cri. L.J. 3752)]

हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को शिकायतकर्ता के रूप में शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया गया। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि:

“यदि न्यायालय किसी कॉर्पोरेट इकाई द्वारा किए गए ऐसे कपटपूर्ण कृत्यों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक अभियोजन का आदेश देने में विफल रहता है और उन्हें बेदाग जाने देता है, तो आने वाली पीढ़ियाँ न्यायपालिका को कभी माफ नहीं करेंगी।”

 DSK Legal पर लटकी तलवार — लाइसेंस रद्द होने का खतरा

DSK Legal को चेतावनी दी गई है कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा, बार काउंसिल में अनुशासनात्मक कार्रवाई और हर्जाने का दावा किया जाएगा। आरोप है कि फर्म ने टाइटल सर्टिफिकेट में यह झूठी राय दी कि लंबित मुकदमों का प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं है और जमीन हर तरह के बोझ से मुक्त है।

Ramniklal v. Varsha, 1991 SCC OnLine Bom 333 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुसार, गलत या भ्रामक टाइटल सर्टिफिकेट जारी करने वाला अधिवक्ता या लॉ फर्म खरीदार को हुए नुकसान की भरपाई के लिए उत्तरदायी हो सकता है। इसके अतिरिक्त, ऐसा आचरण व्यावसायिक कदाचार (professional misconduct) माना जा सकता है, जिसके आधार पर बार काउंसिल के समक्ष अनुशासनात्मक कार्यवाही चल सकती है और परिस्थितियों के अनुसार वकालत का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित या स्थायी रूप से रद्द तक किया जा सकता है।

यह पूरा विवाद अब केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डेवलपर्स द्वारा की जाने वाली घोषणाओं, टाइटल सर्टिफिकेट जारी करने वाले विधि विशेषज्ञों की जिम्मेदारी, RERA में प्रकटीकरण मानकों, तथा अदालत के आदेशों के पालन की जवाबदेही जैसे व्यापक प्रश्न भी उठाता है।

 मुंबई: हाई-प्रोफाइल गोदरेज वडाला पुनर्विकास प्रोजेक्ट से जुड़ा कानूनी विवाद एक नए और गंभीर मोड़ पर आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट और MahaRERA के समक्ष कई कार्यवाहियां शुरू की गई हैं जिनमें कोर्ट के आदेशों का पालन न करने, महत्वपूर्ण तथ्य छुपाने, भ्रामक टाइटल प्रकटीकरण और गलत बयानबाजी से अनुमतियां हासिल करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

 गोदरेज  एक बार फिर कानूनी घेरे में है। MCGM अधिकारियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट की अवमानना याचिका दायर की गई है — आरोप है कि अधिकारियों ने ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार और प्रोजेक्ट का कब्जा बहाल करने तथा गोदरेज की अनुमतियां रद्द कर उसे प्रोजेक्ट से हटाने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। DSK Legal को नोटिस दिया गया है कि वे MahaRERA के समक्ष दाखिल  झूठे और भ्रामक टाइटल सर्टिफिकेट को तत्काल वापस लें। साथ ही MahaRERA में प्रोजेक्ट का पंजीकरण रद्द कराने और गोदरेज, DSK Legal तथा अन्य के खिलाफ महत्वपूर्ण तथ्य छुपाने व गलत बयानबाजी के आरोप में आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। 

यदि ये कार्यवाहियां आगे बढ़ती हैं तो इनके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं — न केवल इस प्रोजेक्ट पर बल्कि डेवलपर की जवाबदेही, टाइटल सर्टिफिकेट जारी करने वाली कानूनी फर्मों की पेशेवर जिम्मेदारी, सार्वजनिक अधिकारियों के कर्तव्य और विवादित प्रोजेक्ट से निर्दोष घर खरीदारों की सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों पर भी।

 संक्षिप्त पृष्ठभूमि

यह विवाद ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के पुनर्विकास अधिकारों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवादों और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा 23.01.2020 को पारित आदेश तथा अन्य परिणामी आदेशों के बाद गोदरेज के प्रोजेक्ट में प्रवेश से उत्पन्न हुआ है। इन घटनाक्रमों के आधार पर कथित तौर पर ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के अधिकार समाप्त किए गए और गोदरेज के पक्ष में सशर्त अनुमतियां दी गईं।

हालांकि 12.03.2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स की स्थिति को 23.01.2020 से पहले की स्थिति में बहाल कर दिया।   इस निर्णय के परिणामस्वरूप गोदरेज के पक्ष में दी गई बाद की सभी अनुमतियां, अधिकार और लाभ रद्द और निष्प्रभावी हो गए। इस आदेश से ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स के विकास अधिकार, कानूनी हक और कब्जे से जुड़े दावे पुनः जीवित हो गए — जिससे प्रोजेक्ट से संबंधित बाद में दी गई तमाम अनुमतियां और स्वीकृतियां बड़े पैमाने पर रद्द और अमान्य करार दी गईं।

विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने दिनांक ०५.११.२०२० के अपने अनुमति आदेश में गोदरेज को स्पष्ट रूप से सशर्त अनुमति दी थी — और वे शर्तें अत्यंत महत्वपूर्ण थीं। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि यह अनुमति बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रलंबित मामले के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी और उस न्यायालय के आदेश गोदरेज पर पूर्णतः बाध्यकारी होंगे। सीधे शब्दों में कहें तो अनुमति देते समय ही महानगरपालिका ने स्पष्ट कर दिया था कि हाईकोर्ट का जो भी निर्णय आएगा वह अंतिम होगा और उसके विरुद्ध कोई आपत्ति स्वीकार्य नहीं होगी। ऐसे में खंडपीठ के १२.०३.२०२६ के निर्णय के बाद गोदरेज के पास इन सशर्त अनुमतियों का सहारा लेकर किसी भी राहत की मांग करने का न कोई नैतिक आधार बचा है और न ही कोई कानूनी अधिकार।

इस फैसले के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) के अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजे गए जिनमें मांग की गई कि खंडपीठ के आदेश को लागू करते हुए ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स को कब्जा और विकास अधिकार वापस दिए जाएं, पहले के प्रतिकूल आदेशों से उत्पन्न अनुमतियां रद्द या वापस ली जाएं और गोदरेज को दी गई अनुमतियों व लाभों के संबंध में उचित कदम उठाए जाएं।

आरोप है कि नोटिस मिलने के बाद भी, खंडपीठ के फैसले के कानूनी परिणामों के बावजूद और काफी समय बीत जाने के बाद भी, MCGM के संबंधित अधिकारियों ने ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स को कब्जा और विकास अधिकार बहाल करने या हाईकोर्ट के आदेश से उत्पन्न परिणामी कार्रवाई करने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

कथित देरी और लगातार अनुपालन न होने के कारण ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स ने MCGM के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक अधिकारियों की लंबी निष्क्रियता के कारण अपीलीय अदालत द्वारा उनकी स्थिति बहाल किए जाने के बावजूद ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।

यह मामला शीघ्र ही बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होने की संभावना है और इसमें न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन, नगर निगम अधिकारियों की जवाबदेही और अपीलीय अदालत द्वारा अधिकारों की बहाली से उत्पन्न परिणामों से जुड़े व्यापक सवाल उठ सकते हैं।

  20 मई 2026: DSK Legal को कानूनी नोटिस — झूठी रिपोर्ट वापस लो, वरना भुगतो

 20.05.2026 को अधिवक्ता दीपाश्री राओरणे ने ईस्ट एंड वेस्ट डेवलपर्स की ओर से DSK Legal को कड़ा कानूनी नोटिस थमाया। साफ मांग की गई — MahaRERA के सामने दाखिल लीगल टाइटल रिपोर्ट फौरन वापस लो। आरोप सीधा और गंभीर है — इस रिपोर्ट में लंबित मुकदमों, सशर्त अनुमतियों, प्रतिस्पर्धी अधिकारों और हाईकोर्ट की कार्यवाहियों के कानूनी असर को जानबूझकर छुपाया गया और खरीदारों को गुमराह करने वाली झूठी और अधूरी तस्वीर पेश की गई। नोटिस की मंशा साफ है — निर्दोष घर खरीदारों को इस धोखे का शिकार होने से बचाना और उन्हें विवादित टाइटल की वजह से होने वाले आर्थिक नुकसान व लंबी कानूनी लड़ाई से महफूज रखना।

  MahaRERA में शिकायत — पंजीकरण रद्द करो, कार्रवाई करो

 इधर एक संभावित खरीदार ने भी MahaRERA का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में तीन साफ मांगें हैं — प्रोजेक्ट का पंजीकरण रद्द करो, दाखिल की गई अनुमतियों और प्रकटीकरण की जांच करो, और उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करो जिन्होंने अदालती कार्यवाहियां छुपाईं, महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्दा डाला और हाईकोर्ट में नई घटनाओं के बावजूद झूठे टाइटल सर्टिफिकेट के सहारे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते रहे। शिकायत में साफ चेतावनी दी गई है कि विवादित विकास अधिकारों और छुपाई गई अहम जानकारियों की वजह से सैकड़ों घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई दांव पर लग सकती है।

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