Pahuja maintains that his affidavit-backed complaint is founded on court records, documentary evidence, and digital proof, which, cannot be contradicted by any court. He states […]
Category: Supreme Court of India
दिल्ली हाई कोर्ट के तीन जजों पर राष्ट्रपति को शिकायत — सोशल एक्टिविस्ट ने लगाए न्यायिक धोखाधड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और संविधान के उल्लंघन के गंभीर आरोप — सीबीआई जाँच व आपराधिक मुकदमे की अनुमति, अटॉर्नी जनरल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मुकदमा दायर करने, जस्टिस यशवंत वर्मा की तर्ज पर तीनों जजों से न्यायिक काम वापस लेने, तथा याचिकाकर्ता के मौलिक संवैधानिक अधिकारों के हनन के एवज में उचित मुआवज़ा की माँग [Case No: PRSEC/E/2026/ /0038577]
दिल्ली के सोशल एक्टिविस्ट और यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की अवमानना सज़ा में गंभीर कानूनी भूल — सज़ा देने वाले जज खुद कठघरे में – सुप्रीम […]
‘Bar & Bench’ Caught Flattering — Collegium’s Decision Exposes the Lies! Justice Revati Mohite-Dere didnt considered for Elevation! The Mask of Paid Journalism Torn Off — Corruption Charges Suppressed in news article, Songs of Praise Sung! Bar Associations Aggressive — Demand for CBI Inquiry!
The Collegium overlooked her name, a petition for criminal action is pending before the High Court — and ‘Bar & Bench’s’ dishonesty stands exposed before […]
‘बार अँड बेंच’ने केली चापलुसी — कॉलेजियमच्या निर्णयाने खोटेपणा उघड! न्यायमूर्ती रेवती मोहिते-डेरे यांना पदोन्नती नाहीच — डावललेच!
पेड जर्नालिझमचा बुरखा फाटला — भ्रष्टाचाराचे आरोप दडवले, स्तुतीचे पोवाडे गायले! ववकील संघटना आक्रमक — सीबीआय चौकशीची जोरदार मागणी! दिनांक १२ जानेवारी २०२६ रोजी ‘बार […]
NCLT मुंबई द्वारा बैंकों के अनाम अधिकारियों के विरुद्ध अवैध अवमानना की सजा सुनाने का चौंकाने वाला और गैरकानूनी फैसला — न्यायमूर्ति अशोक भूषण की NCLAT पीठ द्वारा कड़ी टिप्पणियों सहित निरस्त
यह आदेश अवमानना नियमों के अंतर्गत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना तथा केवल वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा के गैरकानूनी, गुमराह करने वाले एवं भ्रामक […]
NCLT मुंबईने बँकांच्या अनाम अधिकाऱ्यांविरुद्ध बेकायदेशीर अवमान शिक्षा सुनावण्याचा धक्कादायक आणि गैरकायदेशीर निर्णय — न्यायमूर्ती अशोक भूषण यांच्या NCLAT पीठाने कडक ताशेरे नोंदवत रद्द केला
हा आदेश अवमान नियमांअंतर्गत अनिवार्य प्रक्रियेचे पालन न करता तसेच केवळ वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा यांच्या बेकायदेशीर, दिशाभूल करणाऱ्या आणि फसव्या युक्तिवादांच्या आधारे पारित करण्यात […]
सिद्धार्थ वरदराजन–द वायर शपथपत्र विवाद: पहले उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश को छुपाकर धोखाधड़ी से राहत प्राप्त की — फिर झूठ उजागर होने पर माफी मांगी – सर्वोच्च न्यायालय का कानून स्पष्ट है — झूठ उजागर होने के बाद दी गई विलंबित माफी का कोई कानूनी महत्व नहीं – एक सुनियोजित कानूनी साहसिक प्रयास — जो घोर विफलता में बदल गया
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामले में कार्रवाई न करना स्वयं न्यायाधीश को अपने संवैधानिक कर्तव्य के पालन में विफल माना […]
Siddharth Varadarajan–The Wire Affidavit Controversy: First Played Fraud Upon the High Court — Relief Obtained by Suppression of Earlier High Court Order — Then Apology Tendered Only After Fraud Stands Exposed – Supreme Court’s Position Is Unambiguous – – Belated Apology Tendered Only Upon Exposure Carries No Legal Weight — Court Is Bound to Order Prosecution for Perjury and Contempt and impose heavy cost — not taking action Is declared as a Failure of Duty by the Judge- [ Kusha Duruka v. State of Odisha, (2024) 4 SCC 432, Sundar v. State, 2023 SCC OnLine SC 310, ABCD v. Union of India, (2020) 2 SCC 52 Samsun Arthur v. Quinne Logistic, 2015 SCC OnLine Hyd 403,]
A Calculated Legal Adventure Became a Spectacular Misadventure. Suppression of material facts in proceedings before a court — particularly in affidavits and pleadings — attracts […]
गोदरेज वडाला प्रकल्पावर कायदेशीर वादळ: MCGM अधिकाऱ्यांवर हायकोर्ट अवमानना कारवाईचा धोका; DSK Legal ला नोटीस की MahaRERA समोर दाखल खोटे आणि दिशाभूल करणारे टायटल सर्टिफिकेट तात्काळ मागे घ्या; MahaRERA मध्ये नोंदणी रद्द करण्याची आणि फौजदारी कारवाईची मागणी
२९ एप्रिलचा मुंबई हायकोर्टाच्या खंडपीठा चा आदेश — गोदरेजला मोठा धक्का मुंबई हायकोर्टाच्या खंडपीठाने २९ एप्रिल २०२६ रोजी एक ऐतिहासिक आदेश दिला जो गोदरेजसाठी मोठा […]
गोदरेज वडाला प्रोजेक्ट पर कानूनी तूफान: MCGM अधिकारियों पर हाईकोर्ट अवमानना कार्रवाई का खतरा; DSK Legal को नोटिस कि वे MahaRERA के समक्ष दाखिल झूठे और भ्रामक टाइटल सर्टिफिकेट को तत्काल वापस लें; MahaRERA में पंजीकरण रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई की मांग-
29 अप्रैल 2026 का आदेश — गोदरेज के लिए बड़ा झटका बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 29 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश सुनाया जिसे […]