दिशा सालियन मामले में कथित चयनात्मक, तोड़-मरोड़कर और भ्रामक रिपोर्टिंग को लेकर सतीश सालियन ने Bar & Bench, Mumbai Tak और TV9 Marathi को भेजे कानूनी नोटिस; 3 अगस्त की बॉम्बे हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाई पर चुप्पी को लेकर उठाए सवाल

नोटिस में हितों के टकराव, पूर्वाग्रह और विरोधी पक्ष से संबंधों के गंभीर आरोप; Mumbai Tak पर आदित्य ठाकरे की पार्टी के ‘प्रवक्ता की तरह’ काम करने का आरोप

कथित कदाचार का मामला पहले ही हाईकोर्ट के समक्ष; मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई भी संभावित

कानूनी नोटिसों में संबंधित मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और bona fides पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सतीश सालियन के अनुसार, नोटिस में बताए गए विभिन्न उदाहरण और सामग्री एक ऐसा pattern दर्शाते हैं, जिसके आधार पर यह स्पष्टीकरण आवश्यक है कि क्या संबंधित रिपोर्टिंग पूर्वाग्रह, conflict of interest अथवा विरोधी पक्ष से कथित निकटता से प्रभावित थी।

नोटिस में आगे स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित मीडिया संस्थानों द्वारा की गई कथित चयनात्मक, एकतरफा, तोड़-मरोड़कर और भ्रामक रिपोर्टिंग न केवल पत्रकारिता की निष्पक्षता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि Press Council of India द्वारा निर्धारित Norms of Journalistic Conduct, Principles and Ethics का भी उल्लंघन है। इन मानकों के अनुसार, विशेष रूप से न्यायालयीन कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया से सटीकता, निष्पक्षता, संतुलन और जिम्मेदारी बनाए रखने तथा किसी लंबित मामले की अधूरी अथवा भ्रामक तस्वीर जनता के सामने प्रस्तुत न करने की अपेक्षा की जाती है।

नोटिस के अनुसार, यदि कोई मीडिया संस्थान किसी न्यायिक कार्यवाही के प्रतिकूल घटनाक्रम को प्रमुखता से प्रकाशित करता है, लेकिन उसी मामले में बाद में सामने आए महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम को जानबूझकर प्रकाशित नहीं करता और इस प्रकार पहले से बनी कथित गलत, विकृत अथवा अधूरी धारणा को जनता के बीच कायम रहने देता है, तो ऐसा आचरण मान्य पत्रकारिता आचार-संहिता और नैतिक मानकों के विपरीत है। नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि ऐसा आचरण न्यायालयीन कार्यवाही की निष्पक्ष, सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों और बाध्यकारी निर्देशों के भी विरुद्ध है।

इसलिए नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इस पूरे मामले को केवल editorial choice अथवा freedom of press कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सीधे तौर पर पत्रकारिता की जवाबदेही, न्यायालयीन कार्यवाही की निष्पक्ष और सत्य रिपोर्टिंग, जनता के सही एवं संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के अधिकार तथा न्याय के समुचित प्रशासन की शुचिता से जुड़ा गंभीर विषय है।

 

जहां तक Bar & Bench का संबंध है, नोटिस में पक्षपात, conflict of interest तथा महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम को चुनिंदा तरीके से दबाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें विरोधी पक्ष से जुड़े व्यक्तियों, जिनमें आदित्य ठाकरे और उनके वकील सीनियर एडवोकेट सुदीप पासबोला शामिल हैं, के साथ कथित व्यक्तिगत/व्यावसायिक संबंध अथवा dealings की ओर संकेत करने वाली सामग्री का उल्लेख किया गया है।

नोटिस में विशेष रूप से एडवोकेट पासबोला के संबंध में हाल में प्रकाशित एक कथित sponsored/promotional report का उल्लेख किया गया है। सालियन के अनुसार, बार काउंसिल चुनाव में उनकी हार के बावजूद तथा उनके विरुद्ध forgery, false evidence और fraud upon the Court से संबंधित लंबित आरोपों के आधार के रूप में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद, उक्त रिपोर्ट के माध्यम से उनकी छवि को बढ़ावा देने और उनका महिमामंडन करने का प्रयास किया गया।

सालियन का इससे भी गंभीर आरोप है कि यह महज एक अलग-थलग editorial omission नहीं, बल्कि selective coverage और महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाही को रिपोर्ट न करके चलाए जा रहे कथित ‘cover-up’ के एक व्यापक pattern का हिस्सा है।

नोटिस के अनुसार, एक तरफ Bar & Bench ने एडवोकेट पासबोला के पक्ष में अथवा उनका महिमामंडन करने वाली सामग्री प्रकाशित की, लेकिन दूसरी ओर उसने आदित्य ठाकरे तथा उनके कानूनी प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यक्तियों, जिनमें एडवोकेट पासबोला भी शामिल बताए गए हैं, के विरुद्ध कथित perjury, false affidavit/forgery और fraud upon the Court के संबंध में कार्रवाई की मांग करने वाली बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित applications/proceedings तथा उनसे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम को रिपोर्ट नहीं किया, जबकि ये उसी मुकदमे से सीधे संबंधित थे जिसकी रिपोर्टिंग Bar & Bench स्वयं कर रहा था।

नोटिस में इसलिए Bar & Bench से पूछा गया है कि सतीश सालियन और उनकी याचिका के विरुद्ध प्रतिकूल सार्वजनिक धारणा पैदा करने वाली बातें समाचार योग्य थीं, तो विरोधी पक्ष के व्यक्तियों के विरुद्ध perjury, forgery और fraud upon the Court जैसे गंभीर आरोपों से संबंधित लंबित न्यायिक कार्यवाही को उसके पाठकों के सामने क्यों नहीं रखा गया?

सालियन के अनुसार, यदि यह pattern स्थापित होता है तो मामला सामान्य editorial discretion से कहीं आगे जाता है और पूर्वाग्रह, हितों के टकराव, जानबूझकर की गई selective reporting तथा लंबित न्यायिक कार्यवाही की पूरी और संतुलित तस्वीर जनता तक पहुंचने से रोकने के प्रयास का गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

Mumbai Tak पर आदित्य ठाकरे की पार्टी के ‘प्रवक्ता की तरह’ काम करने का आरोप

नोटिस में Mumbai Tak के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सतीश सालियन का आरोप है कि इस विवाद से संबंधित Mumbai Tak की रिपोर्टिंग और उसका रुख आदित्य ठाकरे तथा उनकी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में इतना लगातार रहा है कि इस मामले में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया प्लेटफॉर्म के बजाय वह प्रभावी रूप से ‘पार्टी प्रवक्ता’ की तरह काम करता दिखाई दिया।

नोटिस में इस आरोप के समर्थन में विभिन्न उदाहरणों और सामग्री का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है और Mumbai Tak से इस संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा गया है।

सालियन के अनुसार, मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि संबंधित मीडिया संस्थानों ने कथित रूप से उनकी याचिका के खिलाफ प्रतिकूल जनधारणा पैदा करने वाले घटनाक्रम को प्रमुखता से प्रकाशित किया, लेकिन 3 अगस्त 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान सामने आए उन घटनाक्रम को तुलनीय कवरेज नहीं दिया, जो उनकी शिकायतों और दावों से सीधे संबंधित थे।

नोटिस में कहा गया है कि यदि किसी एक पक्ष के विरुद्ध प्रतिकूल सामग्री को बार-बार प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है, लेकिन उसी पक्ष के दावों को समर्थन देने वाले अथवा पहले प्रस्तुत तस्वीर को materially बदलने वाले बाद के महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम को लगातार प्रकाशित नहीं किया जाता, तो इसे मात्र निर्दोष editorial discretion कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर संबंधित मीडिया संस्थानों से मांग की गई है कि विरोधी पक्ष, उनके वकीलों अथवा उनसे संबंधित व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार के पेशेवर, व्यावसायिक, आर्थिक, व्यक्तिगत अथवा अन्य संबंध या dealings, यदि कोई हों, तो उनका पारदर्शी खुलासा किया जाए, ताकि जनता स्वयं यह आकलन कर सके कि क्या किसी conflict of interest ने रिपोर्टिंग अथवा editorial decisions को प्रभावित किया।

नोटिस का स्पष्ट रुख है कि प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ लंबित न्यायिक कार्यवाही की चुनिंदा रिपोर्टिंग करने अथवा महत्वपूर्ण घटनाक्रम को दबाकर जनता के सामने विकृत तस्वीर प्रस्तुत करने का लाइसेंस नहीं है। यदि कोई मीडिया संस्थान किसी लंबित मुकदमे के एक पक्ष से संबंधित घटनाक्रम को रिपोर्ट करने का निर्णय लेता है, तो पत्रकारिता की निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग है कि उसी मामले की तस्वीर को पूरा करने वाले बाद के महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम भी उसी audience के सामने निष्पक्ष रूप से रखे जाएं।

TV9 Marathi की पुरानी रिपोर्टिंग पर भी गंभीर सवाल; पहले का narrative गलत साबित होने के बाद चुप्पी क्यों?

नोटिस में TV9 Marathi के रिपोर्टर कृष्णा की पूर्व रिपोर्टिंग पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने सतीश सालियन, उनकी याचिका और उनके वकीलों के संबंध में झूठी, तोड़-मरोड़कर पेश की गई, अधूरी और भ्रामक खबरें प्रकाशित कीं, जिससे जनता के सामने उनके बारे में गलत और प्रतिकूल धारणा बनी।

सालियन के अनुसार, इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई कार्यवाही—विशेषकर 3 अगस्त 2026 की महत्वपूर्ण सुनवाई—ने उन पूर्व रिपोर्टों में प्रस्तुत narrative को materially contradict किया और उसकी सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े किए। नोटिस का यह भी दावा है कि पुलिस के संबंध में न्यायालय की टिप्पणियां भी पूर्व रिपोर्टिंग में प्रस्तुत दृष्टिकोण के अनुरूप नहीं थीं।

इसके बावजूद, जब सतीश सालियन और उनके वकीलों के विरुद्ध प्रतिकूल रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही थीं तब सक्रिय रहे संबंधित रिपोर्टर और TV9 Marathi ने बाद के उन न्यायिक घटनाक्रम पर कथित रूप से चुप्पी साध ली, जिन्होंने उनके पहले के narrative को कमजोर अथवा गलत साबित किया।

नोटिस के अनुसार, यह selective और one-sided journalism का गंभीर मामला है। यदि उसी मुकदमे में बाद की न्यायिक कार्यवाही पहले प्रकाशित तस्वीर को सुधारती है, उसका खंडन करती है अथवा उसमें महत्वपूर्ण बदलाव लाती है, तो मीडिया संस्थान उन घटनाक्रम पर चुप रहकर पहले की कथित भ्रामक रिपोर्ट को बिना correction के कायम नहीं रख सकता।

सालियन का आरोप है कि ऐसी चुप्पी के कारण जनता के सामने पहले से बनाई गई कथित गलत और भ्रामक धारणा न केवल कायम रही, बल्कि उसका प्रभाव और गंभीर हुआ। इसलिए TV9 Marathi से स्पष्टीकरण, पूर्व रिपोर्टों का उचित correction/clarification तथा 3 अगस्त की महत्वपूर्ण न्यायिक कार्यवाही की संपूर्ण और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की मांग की गई है।

कथित कदाचार पहले ही बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने; अब मानहानि की अलग कार्रवाई भी संभावित

सतीश सालियन ने आगे कहा है कि संबंधित मीडिया संस्थानों द्वारा किए गए कथित चयनात्मक, झूठे, विकृत और भ्रामक वृत्तांकन, बाद के महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम को कथित रूप से दबाने तथा अन्य कदाचार का मुद्दा पहले ही उचित न्यायिक कार्यवाही के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष उठाया जा चुका है, जहां criminal contempt तथा अन्य लागू penal provisions के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

सालियन के अनुसार, इसलिए यह विवाद अब सिर्फ editorial judgment को लेकर मतभेद का मामला नहीं रह गया है। उनका आरोप है कि पहले की रिपोर्टिंग ने उन्हें, उनके अधिवक्ताओं और लंबित न्यायिक कार्यवाही को गंभीर रूप से prejudiced किया, जबकि बाद में हाईकोर्ट में सामने आए महत्वपूर्ण घटनाक्रम को प्रकाशित न करने से जनता के सामने बनाई गई कथित झूठी, अधूरी और भ्रामक तस्वीर बिना सुधार के बनी रही।

कानूनी नोटिसों के माध्यम से अब संबंधित मीडिया संस्थानों को अपने आचरण का स्पष्टीकरण देने, 3 अगस्त की संपूर्ण और सही न्यायिक घटनाओं को प्रकाशित करने तथा पूर्व में प्रकाशित कथित झूठी, अधूरी अथवा भ्रामक रिपोर्टों का उचित correction/clarification जारी करने का अवसर दिया गया है।

यदि संबंधित मीडिया संस्थान उचित सुधारात्मक कदम उठाने में विफल रहते हैं, तो उन मीडिया संस्थानों तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध अलग से मानहानि (defamation) की कार्यवाही तथा कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपचार शुरू किए जाने की संभावना है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष पहले से मांगी गई criminal contempt और अन्य दंडात्मक कार्रवाई से अलग और अतिरिक्त होगी।

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