बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर शिकायत पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न करने को लेकर मुंबई पुलिस को कड़ी फटकार लगाईं। शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराधों का खुलासा होने के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायालय के समक्ष रखी गई तस्वीरों के बीच दिखाई देने वाली गंभीर विसंगतियों पर भी सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पुलीस सुसाईड की स्टोरी पर संदेह जताते हुए कहा कि तस्वीरों में चेहरे पर ऐसी चोटें दिखाई नहीं देतीं, जिनकी सामान्यतः किसी व्यक्ति के आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने पर अपेक्षा की जाती है।
सतीश सालियान की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ॲड. निलेश ओझा ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दिशा के सभी दांत टूटे होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, तस्वीरों में उसके सभी दांत सुरक्षित दिखाई देते हैं। यह पोस्टमार्टम निष्कर्षों की असत्यता और पुलिस की बेईमानी को प्रमाणित करता है।
अधिवक्ता ने मनसुख हिरेन मामले का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उस मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वाझे द्वारा शुरुआत में एक झूठी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसकी असत्यता बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई जांच में उजागर हुई। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कहा कि वर्तमान मामले में भी इसी प्रकार की हेराफेरी की गई है।
दिशा सालियान की मृत्यु 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड क्षेत्र में स्थित एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से कथित रूप से गिरने के बाद हुई थी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट, यानी एडीआर दर्ज की और उसकी मृत्यु से जुड़ी परिस्थितियों की जांच शुरू की।
जांच के बाद पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि दिशा ने आत्महत्या की थी। हालांकि, उसके पिता सतीश सालियान ने बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या की गई और आरोपी आदित्य ठाकरे जैसे प्रभावशाली व्यक्ति हैं। इसलिए पुलिस ने उन्हें बचाने के लिए एक फर्जी रिपोर्ट तैयार की। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने और जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित करने की मांग की।
सोमवार को जब याचिका सुनवाई के लिए आई, तब हाईकोर्ट ने सवाल किया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर पूर्ण जांच करने के बजाय मामले को केवल आकस्मिक मृत्यु की जांच के रूप में क्यों जारी रखा।
खंडपीठ ने कथित रूप से पूछा:
“जब पीड़िता का पिता उसकी मृत्यु की परिस्थितियों पर संदेह व्यक्त कर रहा है, तब पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने से किसने रोका?”
लोक अभियोजक शिशिर हिरे ने न्यायालय को बताया कि शुरुआत से ही मामले को आकस्मिक मृत्यु के रूप में लिया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस ने दो अवसरों पर जांच की और दोनों बार यह निष्कर्ष निकाला कि दिशा की मृत्यु आत्महत्या के कारण हुई।
सतीश सालियान की ओर से उपस्थित अधिवक्ता नीलेश ओझा ने पुलिस के निष्कर्षों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच रिपोर्टें झूठी, अधूरी और उपलब्ध फॉरेंसिक सामग्री के विपरीत हैं।
अधिवक्ता ओझा ने डॉ. भूपेंद्र शर्मा द्वारा तैयार की गई फॉरेंसिक रिपोर्ट पर भरोसा किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष तस्वीरें और अन्य सामग्री रखी है। तस्वीरों और फॉरेंसिक रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद खंडपीठ ने इतनी ऊंचाई से गिरने पर सामान्यतः दिखाई देने वाली चोटों के अभाव को लेकर सीधे और गंभीर सवाल उठाए।
न्यायमूर्ति डांगरे ने कथित रूप से पूछा:
“यदि कोई व्यक्ति 14वीं मंजिल की ऊंचाई से गिरता है, तो क्या उसके शरीर पर चोटें नहीं होंगी?”
जवाब में लोक अभियोजक ने कहा कि उनके पास कुछ तस्वीरे है जिसमे मृतका की तस्वीरों में सिर पर चोट दिखाई देती है।
अधिवक्ता ओझा ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा प्रारंभ में सतीश सालियान को दिखाई गई तस्वीरों में ऐसी कोई चोट नहीं थी। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बाद में सिर पर चोट दिखाने वाली तस्वीरें गढ़ी गईं या उनमें डिजिटल बदलाव किया गया।
हाईकोर्ट ने आकस्मिक मृत्यु की जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिपोर्ट, जिनमें एडीआर भी शामिल है, दिशा के पिता को उपलब्ध न कराने को लेकर भी पुलिस से सवाल किए।
खंडपीठ ने कहा कि पुलिस स्वयं यह दावा करती है कि कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई और कोई आपराधिक जांच लंबित नहीं है। ऐसी स्थिति में न्यायालय ने सवाल किया कि जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज मृतका के पिता को क्यों नहीं दिए गए।
अधिवक्ता ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि दिशा का मंगेतर रोहन राय कथित साजिश में शामिल था। उन्होंने दावा किया कि दिशा को उसके निवास स्थान से बाहर ले जाकर उसकी हत्या की पूर्व नियोजित साजिश के तहत मलाड स्थित फ्लैट पर लाया गया था।
अधिवक्ता ने आगे आरोप लगाया कि रोहन राय द्वारा दिए गए अलग-अलग और कथित रूप से विरोधाभासी बयानों से उसकी भूमिका और दिशा की मृत्यु से पहले की परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।
अधिवक्ता ओझा ने घटना से संबंधित दृश्य-पुनर्निर्माण अभ्यास पर भी भरोसा किया। उनके अनुसार, पुलिस का दावा था कि दिशा की मृत्यु 14वीं मंजिल से कूदने के कारण हुई। हालांकि, उसका शव कथित रूप से इमारत से लगभग 20 फीट दूर मिला था।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों से जुड़े व्यक्तियों सहित तकनीकी विशेषज्ञों ने राय दी कि पुलिस का संस्करण भौतिक रूप से असंभव प्रतीत होता है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि दिशा केवल इमारत से गिरी या कूदी होती, तो उसका शव सामान्यतः इमारत के आधार के काफी करीब गिरता।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि दृश्य-पुनर्निर्माण अभ्यास (Scene Recreation) ने पुलिस की कहानी को झूठा साबित कर दिया और यह प्रदर्शित किया कि शव उस स्थान पर उस तरीके से नहीं पहुंच सकता था, जैसा पुलिस ने दावा किया।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दृश्य-पुनर्निर्माण रिपोर्ट को बाद में पुलिस रिकॉर्ड से हटा दिया गया, मिटा दिया गया या जानबूझकर रोक लिया गया। यह दलील सुनने के बाद न्यायालय ने गंभीर से चिंता व्यक्त की।
खंडपीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 अगस्त को दोपहर 3 बजे निर्धारित की है।
अपनी याचिका में सतीश सालियान ने एफआईआर दर्ज करने, सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने और अपनी बेटी की मृत्यु में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। याचिका में शिवसेना के विधायक आदित्य ठाकरे, डीनो मोरया, सूरज पंचोली और अन्य के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
सतीश सालियान ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मृत्यु 8 जून 2020 को रहस्यमय परिस्थितियों में हुई। उनका दावा है कि उसके साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या की गई और प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए बाद में राजनीतिक रूप से सुनियोजित पर्दा डालने की कार्रवाई की गई।
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर के रूप में काम करती थीं। वह पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से भी पेशेवर रूप से जुड़ी थीं। सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु दिशा की मृत्यु के छह दिन बाद, 14 जून 2020 को हुई थी।
अधिवक्ता ओझा ने आगे आरोप लगाया कि दिशा के पास आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के कथित ड्रग नेटवर्क से संबंधित सामग्री और साक्ष्य थे। उनके अनुसार, दिशा की मृत्यु का संबंध सुशांत सिंह राजपूत से उस प्रकार नहीं था, जैसा आमतौर पर प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि दिशा को जानबूझकर उसके परिवार से अलग किया गया, मलाड के फ्लैट पर ले जाया गया और पूर्व नियोजित साजिश के तहत उसके साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या की गई। उन्होंने आगे दावा किया कि पुलिस अधिकारियों की सहायता से बाद में आत्महत्या की झूठी कहानी बनाई गई। इसमें सचिन वाझे से कथित रूप से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका भी बताई गई।
अधिवक्ता ने दिशा के पोस्टमार्टम की समयावधि और तरीके को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिशा का पोस्टमार्टम लगभग 72 घंटे की अस्पष्ट देरी के बाद किया गया, जबकि सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमार्टम उनकी मृत्यु के लगभग 12 घंटे के भीतर कर दिया गया था।
अधिवक्ता ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि दिशा के शव को बिना कपड़ों के पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। उन्होंने दावा किया कि बाद में पुलिस ने गवाहों के माध्यम से एक विपरीत कहानी बनाई कि शव पर कपड़े मौजूद थे।
याचिकाकर्ता ने मोबाइल टावर लोकेशन डेटा और अन्य कथित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर भी भरोसा किया है। अधिवक्ता ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे ने कहा था कि घटना की तारीख को वह शहर से बाहर थे, जबकि उनकी मोबाइल टावर लोकेशन कथित रूप से उन्हें उस क्षेत्र में दर्शाती है, जहां अपराध होने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि ऐसे प्रत्यक्षदर्शी मौजूद हैं, जिन्होंने कथित गैंगरेप और हत्या को देखा था। उन्होंने इन सभी आरोपों की पूर्ण और स्वतंत्र जांच, सभी फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण और प्रकटीकरण तथा कथित प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की मांग की है।