‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ : नवभारत के निर्माण के लिए ऐतिहासिक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन का शंखनाद; 24 अक्टूबर को मुंबई में देश की दिग्गज हस्तियों का महामंथन!

सेना के पूर्व मेजर जनरल, ‘रॉ’ के पूर्व प्रशिक्षण अधिकारी, पूर्व रक्षा सचिव, पूर्व पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, न्यायविद, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त उद्योगपति और मानवाधिकार कार्यकर्ता एक मंच पर; भारत के पुनर्निर्माण का राष्ट्रीय ब्लूप्रिंट होगा तैयार!

### ‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ के अध्यक्ष एडवोकेट निलेश सी. ओझा और अंतरराष्ट्रीय संयोजक श्री आशुतोष पाठक का राष्ट्रहित के लिए कार्य करने वाले सभी देशभक्त नागरिकों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से इस ऐतिहासिक अभियान में शामिल होने का आह्वान!

मुंबई, 13 अक्टूबर 2026।

देश को केवल सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन, नए राष्ट्रीय दृष्टिकोण, जवाबदेह प्रशासन और संविधान तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाली नई कार्यसंस्कृति की आवश्यकता है।

इसी व्यापक उद्देश्य से भारत का सर्वांगीण पुनर्निर्माण कर एक न्यायपूर्ण, समृद्ध, शक्तिशाली और मानवतावादी वैश्विक भारत के निर्माण के लिए ‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ (RAJDHARMA – RASHTRODAY : Rise of a New India) नामक स्वतंत्र, गैर-दलीय एवं राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन का शंखनाद किया गया है।

इस आंदोलन के अध्यक्ष एडवोकेट निलेश सी. ओझा और अंतरराष्ट्रीय संयोजक श्री आशुतोष पाठक ने भारत सहित विश्वभर में राष्ट्रहित के लिए समर्पित नागरिकों, विचारकों, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार रक्षकों और जनकल्याण के लिए कार्यरत संस्थाओं से इस ऐतिहासिक राष्ट्रनिर्माण अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया है।

### सत्ता के लिए संघर्ष नहीं, राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं; लक्ष्य है संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन और राष्ट्र का पुनर्निर्माण!

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करने अथवा राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के लिए शुरू किया गया आंदोलन नहीं है।

भारतीय संविधान के मूल्यों पर आधारित न्यायपूर्ण, पारदर्शी, जवाबदेह और लोककल्याणकारी व्यवस्था के निर्माण के लिए जनशक्ति, ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को एकजुट करना इस आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है।

‘राजधर्म’ का अर्थ है कि सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनसेवा की जिम्मेदारी है; अधिकार वर्चस्व स्थापित करने का साधन नहीं, बल्कि न्याय की रक्षा करने का माध्यम है; और शासन व्यक्तिगत या राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि संविधान, कर्तव्य और राष्ट्रहित के अनुरूप संचालित होना चाहिए।

यह आंदोलन किसी एक संस्था, व्यक्ति, धर्म, जाति, समुदाय या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं रहेगा।

संविधान, न्याय, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और मानवकल्याण के मूल्यों में विश्वास रखने वाले प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रनिर्माण की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में सहभागी बनाना आंदोलन का संकल्प है।

### 24 अक्टूबर को मुंबई में राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिविर; नवभारत के निर्माण के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने की शुरुआत!

इस राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन की भावी दिशा, संगठनात्मक संरचना, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को निर्धारित करने के लिए 24 अक्टूबर 2026 को मुंबई में विशेष राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिविर एवं प्रमुख सदस्यों का सम्मेलन आयोजित किया गया है।

इस सम्मेलन में देश के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों, संवैधानिक संस्थाओं के सशक्तीकरण, न्यायिक सुधारों, प्रशासनिक पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और नागरिकों के मौलिक अधिकारों जैसे विषयों पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा।

इस पहल में राष्ट्रीय संविधान रक्षा समिति, सुप्रीम कोर्ट एंड हाईकोर्ट लिटिगेंट्स एसोसिएशन, जेएनजी लॉयर्स एसोसिएशन, इंडियन बार एसोसिएशन, इंडियन जूनियर एडवोकेट्स एंड लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन, ह्यूमन राइट्स सिक्योरिटी काउंसिल, ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स एसोसिएशन, राजधर्म प्रेस रिपोर्टर्स, मीडिया एंड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन, यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और अवेकन इंडिया मूवमेंट सहित कानून, शिक्षा, स्वास्थ्य, पत्रकारिता, मानवाधिकार और समाजसेवा के क्षेत्रों में कार्यरत अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

विशेष रूप से, ‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ एक पूर्णतः स्वतंत्र राष्ट्रीय जनआंदोलन है और यह किसी एक संस्था का विस्तार, उपविभाग या संबद्ध संगठन नहीं है।

इस अभियान में भाग लेने वाली सभी संस्थाएँ अपनी स्वतंत्र पहचान, स्वायत्तता और कार्यक्षेत्र बनाए रखते हुए राष्ट्रनिर्माण के साझा उद्देश्यों के लिए परस्पर सहयोग करेंगी।

### सेना से लेकर खुफिया तंत्र तक, न्यायक्षेत्र से लेकर प्रशासन तक और उद्योग जगत से लेकर सामान्य नागरिकों तक—राष्ट्रनिर्माण के लिए सबकी एकजुटता!

इस आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर चुके अनुभवी, प्रतिष्ठित और राष्ट्रहित के लिए समर्पित व्यक्तियों को एक साझा राष्ट्रीय मंच पर लाने का प्रयास है।

इसमें भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल एवं अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, देश की खुफिया संस्था ‘रॉ’ से जुड़े रहे पूर्व प्रशिक्षण अधिकारी, पूर्व रक्षा सचिव, पूर्व पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ आईपीएस एवं प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता, न्यायविद, विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, अर्थशास्त्री, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त उद्योगपति, चिकित्सक, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, महिला नेतृत्व, युवा वर्ग और सामान्य नागरिकों की भागीदारी प्रस्तावित है।

इस पहल का संदेश स्पष्ट है—भारत का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार या राजनीतिक नेतृत्व की नहीं है; बल्कि देश की सामूहिक बुद्धिमत्ता, अनुभव, ज्ञान, ईमानदारी, विशेषज्ञता और जागरूक जनशक्ति के संयुक्त प्रयासों से ही वास्तविक राष्ट्रनिर्माण संभव है।

### केवल समस्याओं पर चर्चा नहीं, बल्कि समाधान और क्रियान्वयन का राष्ट्रीय ब्लूप्रिंट होगा तैयार!

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ अभियान का उद्देश्य केवल देश की समस्याओं की सूची तैयार करना या वर्तमान व्यवस्था की कमियों की आलोचना करना नहीं है।

समस्याओं के व्यावहारिक, वैज्ञानिक, संविधानसम्मत और क्रियान्वयन योग्य समाधान खोजकर उनके लिए ठोस राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करना इस आंदोलन का प्रमुख लक्ष्य है।

इसके लिए न्यायिक और प्रशासनिक सुधार, भ्रष्टाचारमुक्त एवं जवाबदेह शासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आम नागरिकों के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ, रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, महिला सुरक्षा, मानवाधिकारों का संरक्षण, सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और युवा नेतृत्व के विकास जैसे विषयों पर विशेषज्ञों की सहायता से विशेष कार्यसमूह गठित करने का प्रस्ताव है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाना, नागरिकों को समय पर न्याय दिलाना, सत्ता के दुरुपयोग से नागरिकों की रक्षा करना तथा सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों में संविधान और जनता के प्रति जवाबदेही की भावना को मजबूत करना इस अभियान की प्रमुख प्राथमिकताएँ होंगी।

भारत को केवल आर्थिक या सैन्य महाशक्ति बनाना ही इस आंदोलन का अंतिम लक्ष्य नहीं है; बल्कि न्याय, नैतिकता, संविधानसम्मत शासन, ज्ञान, विज्ञान और मानवता के क्षेत्रों में संपूर्ण विश्व के लिए आदर्श बनने वाले भारत का निर्माण करना इस अभियान का व्यापक संकल्प है।

### केवल संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठ, चरित्रवान और राष्ट्रहित के लिए समर्पित नागरिकों के निर्माण का भी महासंकल्प!

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ आंदोलन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी तंत्र द्वारा प्रत्येक नागरिक को संविधान से प्राप्त मौलिक अधिकारों का पूर्ण एवं प्रभावी संरक्षण मिले, शासन के प्रत्येक निर्णय में मानवहित, मानवीय गरिमा और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा इसके साथ ही प्रत्येक नागरिक को उसके संवैधानिक, सामाजिक और राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाया जाए।

केवल अधिकारों की मांग करने वाला नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने वाला; केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति के बारे में सोचने वाला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देने वाला; और आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत स्वार्थ एवं निजी हितों का त्याग कर राष्ट्रहित तथा समाजहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाला चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और संस्कारयुक्त नागरिक तैयार करना इस अभियान का प्रमुख लक्ष्य होगा।

इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में संवैधानिक मूल्यों, नैतिकता, ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन, सेवाभाव, राष्ट्रीय एकता, मानवतावादी दृष्टिकोण और त्याग की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। बचपन से ही विद्यार्थियों में उत्तम चरित्र, विवेकपूर्ण सोच, कर्तव्यभावना और राष्ट्रनिष्ठा विकसित करने के लिए मूल्याधारित शिक्षा, जनजागरण और व्यक्तित्व विकास के व्यापक कार्यक्रम चलाने का संकल्प है।

आंदोलन की भूमिका स्पष्ट है—केवल अच्छे कानून बनाने या शासन व्यवस्था बदलने से महान राष्ट्र का निर्माण नहीं होता; इसके लिए अच्छे शासक, ईमानदार प्रशासन और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण, उच्च चरित्र वाले, कर्तव्यपरायण, संवेदनशील तथा राष्ट्रहित के लिए समर्पित नागरिकों का निर्माण आवश्यक है।

“शासन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे और नागरिक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें; अधिकार और कर्तव्य के इसी संतुलन से वास्तविक अर्थों में न्यायपूर्ण, सुसंस्कृत, शक्तिशाली और मानवतावादी भारत का राष्ट्रोदय संभव होगा।”

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ का मूलमंत्र होगा—‘शासन में राजधर्म, नागरिकों में कर्तव्यधर्म, शिक्षा से चरित्रनिर्माण और प्रत्येक कार्य में राष्ट्रहित सर्वोपरि!’

### ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ से मानवतावादी वैश्विक भारत के निर्माण तक!

भारत की प्राचीन संस्कृति में निहित ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’—अर्थात् संपूर्ण विश्व एक परिवार है—की उदात्त भावना तथा भारतीय संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के मूल्य इस आंदोलन का वैचारिक आधार होंगे।

भारतीय संस्कृति की ज्ञानपरंपरा, आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सार्वभौमिक मानवतावादी मूल्यों का समन्वय करके नवभारत का निर्माण करना इस अभियान का दृष्टिकोण है।

प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार, सुरक्षा, समान अवसर और न्याय प्राप्त हो; साथ ही वैश्विक शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और संपूर्ण मानवजाति के कल्याण के लिए भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए, यही इस आंदोलन की परिकल्पना है।

शासन में राजधर्म, समाज में कर्तव्यभावना, नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना तथा व्यवस्था में न्याय और जवाबदेही स्थापित हुए बिना भारत का वास्तविक राष्ट्रोदय संभव नहीं है, ऐसी इस आंदोलन की मान्यता है।

### अध्यक्ष एडवोकेट निलेश सी. ओझा और अंतरराष्ट्रीय संयोजक आशुतोष पाठक का देशवासियों से आह्वान

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ के अध्यक्ष एडवोकेट निलेश सी. ओझा और अंतरराष्ट्रीय संयोजक श्री आशुतोष पाठक ने राष्ट्रहित, संवैधानिक मूल्यों, न्याय और मानवकल्याण के लिए कार्य करने वाले सभी नागरिकों तथा संस्थाओं से इस स्वतंत्र जनआंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।

उन्होंने कहा कि देश के अनुभवी व्यक्तियों के ज्ञान, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की क्षमताओं, युवा पीढ़ी की ऊर्जा और सामान्य नागरिकों की राष्ट्रनिष्ठा को एक साझा राष्ट्रीय संकल्प में परिवर्तित करने का यही उचित समय है।

“अब केवल देश के सामने उपस्थित समस्याओं को गिनाने का समय नहीं रहा है; बल्कि उन समस्याओं के ठोस समाधान खोजने, राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने और जिस नवभारत की हम कल्पना करते हैं, उसके निर्माण में प्रत्यक्ष योगदान देने का समय आ गया है। वर्तमान व्यवस्था से केवल सवाल पूछना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण, पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी व्यवस्था के निर्माण के लिए सक्रिय पहल करना हमारा संकल्प है। राष्ट्रनिर्माण के इस ऐतिहासिक कार्य में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।”

24 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय मार्गदर्शन शिविर इस व्यापक राष्ट्रीय संकल्प को ठोस कार्ययोजना में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

### एक राष्ट्र, एक संकल्प—न्यायपूर्ण, समृद्ध और मानवतावादी भारत!

‘राजधर्म – राष्ट्रोदय’ केवल एक आंदोलन का नाम नहीं है; बल्कि यह भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण, संवैधानिक सुशासन, जिम्मेदार नागरिकता, व्यवस्था परिवर्तन और मानवतावादी वैश्विक नेतृत्व का महासंकल्प है।

सत्ता से ऊपर सेवा, व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रहित, अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर राष्ट्रनिर्माण को प्राथमिकता देने वाले नए भारत का निर्माण करना इस आंदोलन का दृढ़ संकल्प है।

“सत्ता नहीं, सेवा का संकल्प!”

“केवल राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति का नया मार्ग!”

“न्याय से सुशासन, सुशासन से राष्ट्रनिर्माण और राष्ट्रनिर्माण से विश्वकल्याण!”

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राजधर्म – राष्ट्रोदय
RAJDHARMA – RASHTRODAY
Rise of a New India

स्वतंत्र राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन

अध्यक्ष (President): एडवोकेट निलेश सी. ओझा

अंतरराष्ट्रीय संयोजक (International Convenor): श्री आशुतोष पाठक

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