दिशा सालियान मामला: गैंगरेप और हत्या की पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न करने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर शिकायत पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न करने […]

केवळ पोलिसच नव्हे, तर निर्दोष व्यक्तीला डिस्चार्ज न करता बेकायदेशीरपणे फौजदारी खटल्याला सामोरे जाण्यास भाग पाडणाऱ्या न्यायाधीशांनाही भरपाई द्यावी लागू शकते; उच्च न्यायालयाने दंडाधिकाऱ्याला आणि सत्र न्यायाधीशाला वैयक्तिकरित्या भरपाई देण्याचे आदेश दिले [Sunil Pandit v. State of Bihar, 2024 SCC OnLine Pat 959]

दोषी न्यायाधीशांविरुद्ध विभागीय (Disciplinary) कारवाईबरोबरच, प्रकरणाच्या स्वरूपानुसार फौजदारी खटले, दिवाणी नुकसानभरपाईचे दावे तसेच न्यायालयाच्या अवमानाची (Criminal Contempt) कार्यवाहीही होऊ शकते. विविध प्रकरणांमध्ये न्यायाधीशांना कारावास, निलंबन, […]

केवल पुलिस ही नहीं, निर्दोष को डिस्चार्ज करने के बजाय गैरकानूनी मुकदमा चलाने वाले जजों को भी देना पड़ सकता है मुआवजा; हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट और सेशन जज को व्यक्तिगत भुगतान का दिया आदेश [Sunil Pandit v. State of Bihar, 2024 SCC OnLine Pat 959]

दोषी न्यायाधीशों के विरुद्ध विभागीय (Disciplinary) कार्रवाई के अतिरिक्त, परिस्थितियों के अनुसार आपराधिक मुकदमे, दीवानी हर्जाने के दावे तथा न्यायालय की अवमानना (Criminal Contempt) की […]

सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर कथित झूठे और एकतरफा भाषण को लेकर GZLA ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश ए. पी. शाह को कानूनी नोटिस भेजा; नोटिस में पुलिस पर हमले से जुड़े मामलों को प्रभावित करने तथा घायल पुलिसकर्मियों एवं उनके परिवारों की भावनाओं को आहत करने का आरोप

नोटिस में आरोप— न्यायमूर्ति ए. पी. शाह ने आंदोलन को केवल शांतिपूर्ण बताकर तथा FIR को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत […]

GZLA Serves Legal Notice on Justice A. P. Shah (Retd.) Over Allegedly False and One-Sided Speech on Matter Pending Before Supreme Court; Notice Alleges Remarks Prejudiced Cases Relating to Attacks on Police and Hurt the Sentiments of Injured Police Personnel and Their Families

The GenZ Lawyers Association alleges that Justice A. P. Shah falsely portrayed the agitation as consisting only of peaceful protests and suggested that criminal FIRs […]

The Higher the Office, the Greater the Responsibility—and the More Severe the Punishment for Abuse of Power: Supreme Court Settles the Law While Sentencing a Minister and the Chief Secretary. No One Is Above the Law but law is above everyone. [T.N. Godavarman Thirumulpad v. Ashok Khot, (2006) 5 SCC 1 (Full bench)]  

Courts Cannot Remain Passive When the Powerful Are Shielded. The Constitution Commands Accountability, Not Immunity. Constitutional Courts Are Duty-Bound to Intervene Whenever Investigation or Prosecution […]

‘केजरीवाल को नरमी, मुझे कठोरता क्यों?’ जस्टिस नवीन चावला एवं जस्टिस रवींद्र दुडेजा की अदालतों से मामला स्थानांतरित करने की मांग

डॉ. कपिल कक्कड़ ने कहा—  दोनों मामलों में अलग–अलग प्रक्रियात्मक व्यवहार से निष्पक्षता पर उचित आशंका उत्पन्न होती है; न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, […]